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साया का शहर: अंतरराष्ट्रीय अपराध, अंग तस्करी और हीरो की खतरनाक लड़ाई (एपिसोड 3)

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  कहानी का नाम: "साया का शहर" एपिसोड 2: अंधेरे के पर्दे के पीछे  अगर आपने पिछला एपिसोड 2  नहीं पढा है तो यहाँ से पढ़ लीजिए अब आगे.. विक्रम की फैक्ट्री पर छापा मारने और रिया को बचाने के बाद अर्जुन ने महसूस किया कि यह सिर्फ शुरुआत थी। विक्रम के गिरोह की जड़ें बहुत गहरी थीं। वह सिर्फ एक स्थानीय गैंगस्टर नहीं था, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट का हिस्सा था, जो अंग तस्करी, ड्रग सप्लाई और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा था। अर्जुन को रिया ने बताया कि फैक्ट्री में कई बच्चे और महिलाएं कैद हैं। वे केवल किडनैपिंग के लिए नहीं, बल्कि अंग तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। विक्रम का गिरोह बच्चों और युवाओं के अंग निकालकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचता था। रिया ने यह भी बताया कि विक्रम के पास कई विदेशी क्लाइंट हैं, जो इस घिनौने व्यापार को चला रहे हैं। अर्जुन ने ठान लिया कि वह इस रैकेट को जड़ से उखाड़ फेंकेगा। उसने विक्रम के गिरोह के एक छोटे सदस्य, राहुल, को पकड़ लिया। राहुल से जब अर्जुन ने सख्ती से पूछताछ की, तो उसने बताया कि यह रैकेट सिर्फ विक्रम तक सीमित नहीं है।...

श्रापित मंदिर का अंत: सच्चाई और रहस्य का उजागर होना (एपिसोड 5)

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  कहानी: "अनदेखा सच" (एपिसोड 5: श्राप का अंत या नई शुरुआत) पिछली कड़ी: आर्या ने मंदिर की तीनों पहेलियां हल कर लीं और एक रहस्यमय सीढ़ी के रास्ते नीचे उतरने लगी। मंदिर के अंदर चीखों और अजीब आवाजों ने माहौल को और डरावना बना दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या आर्या इस श्रापित मंदिर से बाहर निकल पाएगी? अब आगे... सीढ़ियां आर्या को एक विशाल भूमिगत कक्ष में ले गईं। यह कक्ष अंधेरे और रोशनी का अद्भुत संगम था। चारों ओर सुनहरी चमकती हुई धूल हवा में तैर रही थी। कक्ष के बीच में एक पुराना लकड़ी का बक्सा रखा हुआ था, जिस पर प्राचीन प्रतीक अंकित थे। आर्या ने चारों ओर देखा। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसकी हर हरकत पर नजर रख रहा है। बक्से के पास एक पत्थर की पट्टी पर लिखा था: "जो इस खजाने को छुएगा, वह श्रापित आत्माओं का हिस्सा बन जाएगा। लेकिन अगर तुम सच्चे इरादे से आई हो, तो इसे खोलो और सच को मुक्त करो।" आर्या ने महसूस किया कि यह क्षण निर्णायक था। उसने बक्से को धीरे-धीरे खोला। अंदर एक सुनहरा आभूषण और एक पुरानी किताब थी। जैसे ही उसने आभूषण को छुआ, चारों ओर से हवा तेज हो गई और कक्ष की दीवारों...

श्रापित मंदिर की अंतिम पहेली: निधिवन के खतरनाक रहस्यों की रोमांचक कहानी (एपिसोड 4)

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     कहानी: "अनदेखा सच " (एपिसोड 4: श्रापित पहेलियों का खेल)         पिछली कड़ी :    आर्या ने मंदिर की पहली पहेली हल की, लेकिन मंदिर के अंदर का माहौल और खतरनाक हो गया। दीवारों से उभरती परछाइयां उसे डरा रही थीं, और बूढ़ा आदमी गायब हो चुका था। अब आर्या को दूसरी पहेली का सामना करना है।   अब आगे... आर्या ने अपने डर को दबाते हुए दूसरी दीवार की ओर देखा, जहां एक और चमकता हुआ प्रतीक उभरा। एक गूंजती हुई आवाज ने दूसरी पहेली का ऐलान किया:   *"मैं वह हूं, जिसे कोई छू नहीं सकता, लेकिन हर कोई महसूस कर सकता है। मैं अदृश्य हूं, लेकिन जब मैं आता हूं, तो सब कुछ बदल जाता है। बताओ, मैं कौन हूं?"*   आर्या ने कुछ देर सोचा। उसके दिमाग में कई चीजें आईं, लेकिन समय सीमित था। अचानक उसे अहसास हुआ। उसने धीरे से कहा, "हवा।"   जैसे ही आर्या ने जवाब दिया, प्रतीक की चमक और तेज हो गई, और एक नया दरवाजा खुला। लेकिन उस दरवाजे के पीछे का दृश्य और डरावना था। वहां एक गहरा अंधेरा था, जिसमें अजीबोगरीब आवाजें गूंज रही थीं।   आर्या...

अंधेरे का सामना: निधिवन के श्रापित मंदिर की पहेलियों की कहानी (एपिसोड 3)

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     कहानी: "अनदेखा सच " *(एपिसोड 3: अंधेरे का सामना)*       पिछली कड़ी:   मंदिर का दरवाजा: निधिवन के रहस्यमयी खजाने की कहानी का दूसरा अध्याय आर्या ने निधिवन के प्राचीन मंदिर के दरवाजे को खोला और अंदर कदम रखा। वहां उसे अजीबोगरीब प्रतीकों और एक रहस्यमय खजाने की कहानी के बारे में पता चला। जब वह बाहर निकलने का रास्ता ढूंढने की कोशिश कर रही थी, उसे अपने पीछे किसी की मौजूदगी का अहसास हुआ।  अब आगे... मंदिर के भीतर घुप्प अंधेरा छा गया। आर्या की टॉर्च अचानक बंद हो गई थी, और वह खुद को ठंडे और डरावने माहौल के बीच घिरी हुई महसूस कर रही थी। पीछे से आई ठंडी सांस और रहस्यमयी आवाज ने उसे झकझोर दिया।   "कौन हो तुम?" उसने घबराते हुए पूछा।   अंधेरे में एक हल्की सी परछाई दिखाई दी। वह धीरे-धीरे आर्या के करीब आ रही थी। आर्या ने अपने बैग से एक माचिस निकाली और जैसे ही उसने माचिस जलाई, सामने एक बूढ़ा आदमी खड़ा था। उसकी आंखें लाल चमक रही थीं, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।   "तुम्हें यहां नहीं होना चाहिए था," बूढ़े आदमी ने ...

मंदिर का दरवाजा: निधिवन के रहस्यमयी खजाने की कहानी का दूसरा अध्याय

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कहानी: "अनदेखा सच " (एपिसोड 2: मंदिर का दरवाजा)       पिछली कड़ी:   रहस्यमयी जंगल की कहानी: निधिवन के श्रापित खजाने का अनसुलझा सच आर्या ने निधिवन के रहस्यमयी जंगल में प्रवेश किया और वहां एक प्राचीन मंदिर पाया। बुढ़िया की चेतावनी के बावजूद, उसने मंदिर का दरवाजा खोला। अंदर से आती रहस्यमय रोशनी और गूंजती आवाज ने कहानी को और रोमांचक बना दिया।    अब आगे.. मंदिर के अंदर से आती रोशनी इतनी तीव्र थी कि आर्या को अपनी आंखें कुछ क्षणों के लिए बंद करनी पड़ीं। जब उसने दोबारा आंखें खोलीं, तो वह स्तब्ध रह गई। मंदिर के अंदर की दीवारें अजीबोगरीब चित्रों और प्रतीकों से सजी थीं, जो किसी प्राचीन सभ्यता की कहानी बयां कर रहे थे।   "तुम यहां क्यों आई हो?" वह आवाज फिर गूंजी। यह आवाज न तो पुरुष की थी, न स्त्री की, बल्कि एक ऐसी आवाज थी, जो सीधे उसकी आत्मा तक पहुंच रही थी।   आर्या ने हिम्मत जुटाकर कहा, "मैं सच जानना चाहती हूं। यह जगह, यह मंदिर... क्या छिपा है यहां?"   आवाज ने कहा, "तुम सच जानना चाहती हो, लेकिन क्या तुम उसके लिए तैयार हो? यह खजान...

रहस्यमयी जंगल की कहानी: निधिवन के श्रापित खजाने का अनसुलझा सच

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  कहानी: "अनदेखा सच" (एपिसोड 1: रहस्यमयी गांव ) यह कहानी एक छोटे से गांव, "निधिवन" की है, जहां हर किसी की जिंदगी सामान्य दिखती है, लेकिन एक ऐसा रहस्य छिपा है, जो सालों से किसी को चैन से सोने नहीं देता। हर कोई इस गांव के बारे में जानना चाहता है, लेकिन यहां के लोग अजनबियों से दूर रहते हैं। रात का समय था। निधिवन गांव में हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था। चांदनी रात के बीच एक लड़की, "आर्या", गांव के बाहर जंगल की ओर जा रही थी। आर्या एक युवा पत्रकार थी, जिसने निधिवन के रहस्य के बारे में सुना था। वह इस गांव की सच्चाई जानने और अपने ब्लॉग के लिए एक शानदार कहानी लिखने की तलाश में थी। गांव के बुजुर्गों का कहना था कि जो कोई भी निधिवन के जंगल में गया, वह कभी वापस नहीं आया। लेकिन आर्या को इन बातों पर विश्वास नहीं था। उसने सोचा कि यह सब बस एक अफवाह है। जैसे ही वह जंगल में कदम रखती है, उसे अजीब सी आवाजें सुनाई देती हैं। पत्तों की सरसराहट, दूर से आते भेड़ियों की आवाज, और हवा का अजीब सा झोंका। वह खुद को हिम्मत दिलाते हुए आगे बढ़ती है। जंगल में कुछ दूर चलने के बाद, आर्या को ...

chhoti bachchi ki badi kahani-1

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छोटी बच्ची की बड़ी कहानी पार्ट- 1  page 1 2   3 नमस्कार दोस्तों मेरा नाम मनोज कुमार है| में आप सभी को एक ऐसी कहानी की तरफ ले जा रहा हु जो एक पांच साल की छोटी बच्ची की जीवनी है| वह क्या क्या कराती है, दोस्तों आप चोंक जायंगे की वह पांच साल की छोटी बच्ची भी ऐसा कर सकती है| दोस्तों ये कहानी लम्बी जरुर है, लेकिन बोर करने वाली नहीं है| चलो में अब कहानी शुरू करता हु आपका टाइम भी ख़राब नहीं हो | कहानी के पात्र :-   छोटी बच्ची का नाम पूनम है ,लड़की के पिता का नाम रमेश है ,लड़की का भाई जो उसी के बराबर है उसका नाम दीपक है ,लड़की की माँ का नाम सुनीता है यह परिवार एक मिडिल परिवार है, इस कहानी में लड़की का पिता एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है | सुनीता घर का काम संभालती है |पूनम का भाई वेसे तो वो पूनम से छोटा है लेकिन हाईट में पूनम की ही बरावर लगता है | छोटा परिवार है , एक दिन पूनम के पापा यानी रमेश कम्पनी में अधिक काम होने की वजह से लेट आने वाले थे तो उन्होंने घर पर फोन किया की वो कुछ देरी से आयेंगे   तुम सब खाना खा लेना | में कम्पनी में खाकर आऊंगा | पूनम के दिमाग...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। ajnabi hai par lagta hai apna sa rista Part-4

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  अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। रवि साधु के पास गया। और कहने लगा रिया को पुरानी बातें याद दिलाना बहुत ही मुश्किल है। पता नहीं मैं यह सब कैसे कर पाऊंगा। कर भी पाऊंगा या नहीं मैं नहीं जानता। यह सुनकर साधु ने कहा। बेटा यह काम बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए मैं यह बात जानता हूं लेकिन नामुमकिन नहीं है। तुम कोशिश करते रहो देखना एक दिन तुम्हारी कोशिश जरूर कामयाब होगी और रिया को सारी पुरानी बातें याद आ जाएगी फिर वह तुम्हें भी पहचानने लगेगी और तुम्हारे साथ तुम्हारे परिवार में लौट जाएगी। ऐसा सुनकर रवि ने कहा बाबा तुम ठीक कहते हो मुझे अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए एक ना एक दिन मेरी कोशिश जरूर रंग लाएगी और रिया को सच में सब कुछ याद आ जाएगा उसकी याददाश्त वापस आ जाएगी और फिर मेरी जिंदगी दोबारा से खुशहाल हो जाएगी। फिर रवि वापस रिया के पास चला गया। और रिया से कहने लगा। कि तुम मुझे यह बताओ तुम्हें खाने में क्या क्या पसंद है तुम्हें कौन सा रंग पसंद है कौन से फूल पसंद है अपनी पसंद ना पसंद मुझे सब कुछ बताओ। तब रिया ने कहा मेरी पसंद ना पसंद मुझे खुद भी याद नहीं है। मुझे लगता है बाबा ने जो कहा था वह सच...

Ajnavi hai par lagta hai apna sa rista Part-2

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अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता।  Part-2 अगर आपने इस कहानी का पार्ट 1 नहीं पढ़ा हो तो आप नीचे क्लिक करके उस पार्ट-1  को भी पढ़ लो  अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता।-पार्ट-1 साधु की कुटिया से रिया मेले में पहुंचती है और उधर से रवि अपने घर से मेले में पहुंचता है। और साथ में रवि के दिल में यह उम्मीद भी होती है कि शायद आज इस मेले में मुझे मेरी खोई हुई रिया मिल जाए। रवि धीरे-धीरे करके मेले में अपनी रिया को ढूंढने लगता है। वह धीरे धीरे कर के मेले में आगे बढ़ता चला जाता है।  मेला काफी बड़ी जगह में लगा हुआ था। इसलिए रवि को बहुत ही परेशानी हो रही थी इतने बड़े मेले में रिया को ढूंढने में। रवि को पता नहीं था कि रिया उसे मेले में मिलेगी भी या नहीं। बस वह अपने दिल की बात मानकर रिया को मेले में ढूंढे जा रहा था। क्योंकि उसका दिल बार-बार कह रहा था कि आज इस मेले में उसकी रिया उसे मिलने वाली है। इधर रिया सारी बातों से अनजान और बेफिक्र होकर मेले में घूम रही थी और आनंद ले रही थी। तभी रास्ते में रिया को एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर दिखाई दिया। उस मंदिर को देखते ही रिया को साधु की कही ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता ajnavi hai par lagta hai apna sa rista Part-1

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 अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-1 यह कहानी है रिया और रवि की। रिया और रवि पहले से ही शादीशुदा थे। उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत अच्छे से गुजर रही थी। 1 दिन रिया और रवि दोनों शादी के बाद दर्शन करने किसी पहाड़ी पर बने मंदिर के दर्शन करने के लिए अपनी कार से जा ही रहे थे कि रास्ते में किसी दूसरी कार की टक्कर लगने की वजह से उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। जिससे उनकी कार का बैलेंस बिगड़ गया। और उस कार एक्सीडेंट में रिया कार से निकलकर बहती नदी में जा गिरी। जो  नदी पहाड़ी पर जाने वाले रोड के बराबर में बह रही थी। रिया नदी में बह जाने के कारण बहुत दूर जा चुकी थी। और नदी के किनारे बसी एक दूसरी बस्ती की तरफ को जाकर रुक  गई थी। जिसकी वजह से वह रवि से बिछड़ गई थी। रवि ने रिया को ढूंढने की बहुत कोशिश की पर रिया उसे नहीं मिल पाई। रवि को रिया की चिंता होने लगी और वह पुलिस स्टेशन चला गया और रिया के  गुमशुदा होने की रिपोर्ट लिखा दी। और अपने परिवार के पास चला गया। और परिवार वालों को सारी बात बता दी। और साथ में यह भी बता दिया कि उसने पुलिस में रिपोर्ट भी लिखवा दी है रिया के गुमशुदा ह...

अपने तो अपने ही होते हैं। apne to apne hi hote hain

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  अपने तो अपने ही होते हैं। रवि और कुलदीप छोटे बड़े भाई थे जिसमें रवि बड़ा भाई था और कुलदीप छोटा भाई था। दोनों की शादी हो गई थी तो इसीलिए दोनों अपनी-अपनी पत्नियों के साथ खुशी खुशी एक ही घर में रहा करते थे। शादी के बाद दोनों की पत्नियां कुछ साल तक तो ठीक तरह आपस में मिलजुल कर रहती थी।  लेकिन फिर पड़ोसियों के बहकावे में आकर एक दूसरे से लड़ने झगड़ने लगी। दोनों भाई रवि और कुलदीप बहुत परेशान थे और दोनों बस दिन-रात यही सोचते रहते कि अपनी-अपनी पत्नियों में सुला कैसे करवाएं कैसे उन दोनों को पहले की तरह साथ-साथ कैसे रखें।  जैसे तैसे अपनी मां को राजी करके और अपनी हिम्मत को इकट्ठा करके उन दोनों में सुलह कराने के लिए बैठते बहुत। थे। वैसे ही दोनों देवरानी जेठानी एक दूसरे में कमी निकालना एक दूसरे की चुगली करना एक दूसरे से लड़ाई झगड़ा करने बैठ जाती थी। इससे रवि और कुलदीप बेहद परेशान हो गए थे कि इस तरह तो हम दोनों इन दोनों की कभी सुला ही नहीं करा पाएंगे। और हमारे घर का क्लेश कभी खत्म ही नहीं होगा बल्कि और बढ़ता ही चला जाएगा। रवि बड़ा भाई था और कुलदीप छोटा भाई था। इसीलिए रवि की पत्नी कुलद...

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। koshis karne walon ki kabhi haar nahin hoti

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 कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह कहानी है राजेश की राजेश एक गांव का पढ़ा-लिखा और सुंदर लड़का था। और उसका बचपन से ही सपना था कि वह शहर में जाकर अपना एक बिजनेस करें। जिससे वह अपने परिवार को सारे सुख दे सकें। और इसीलिए वह बचपन से ही बहुत मन से पढ़ाई करता रहा। और पढ़ाई के साथ-साथ इंग्लिश भी सीखता रहा क्योंकि वह जानता था कि अगर शहरों में बिजनेस करना है तो इंग्लिश भाषा आनी बहुत ही जरूरी है।  इसलिए वह इंग्लिश भी अच्छे से जानता था। अब धीरे-धीरे करके समय बीतता गया उसकी पढ़ाई पूरी हो गई। तब उसने सोचा मेरी पढ़ाई पूरी हो गई है तो क्यों ना मैं शहर जाकर अब बिजनेस करने की कोशिश करूं। लेकिन उसके लिए मुझे कुछ दिन किसी बिजनेसमैन के साथ नौकरी करनी पड़ेगी ताकि मैं समझ सकूं कि बिजनेस कैसे होता है। उसके लिए मुझे किसी बिजनेसमैन के वहां मैनेजर की नौकरी  करनी होगी।  क्योंकि दूसरे के बताने और खुद के सीखने से जमीन आसमान का फर्क होता है खुद के सीखने से तजुर्बा बहुत अच्छा हो जाता है और किसी भी काम को करने के लिए तजुर्बे की बहुत जरूरत होती है।  ऐसा सोचकर वह गांव से शहर के लिए निकल ...

कंजूस सास की कंजूसी होशियार बहू ने खत्म करी। kanjoos saas ki kanjusi hoshiyaar bahu ne khatm kari

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  कंजूस सास की कंजूसी होशियार बहू ने खत्म करी।  kanjoos saas ki kanjusi hoshiyaar bahu ne khatm kari   विमला एक बहुत ही कंजूस औरत थी। उसका एक बेटा था गोपाल और उसकी पत्नी राधा थी। राधा और गोपाल की शादी को 1 साल हो गया था लेकिन विमला ने अपने कंजूसी के चलते उन्हें कहीं बाहर घूमने के लिए नहीं भेजा था वह चाहते थे कि हम भी औरों की तरह घूमने जाएं लेकिन विमला कहती थी कि बाहर घूमने जाने का क्या फायदा बेकार पैसा ही खर्च होगा गांव में एक से एक अच्छी जगह है वहां जाकर घूम आओ। तुम्हें अकेले ही घूमने जाना है तो अकेले जाओ कोई नहीं जाएगा तुम्हारे साथ में लेकिन फालतू पैसा बर्बाद मत करो। इस पर गोपाल ने कहा हां मां मैं समझता हूं कि सिर्फ दूसरों की होड़ करना दूसरों की होड़ करते हुए कहीं खर्चीली जगह पर जाना दो-तीन दिन रुक के आना बहुत ही खर्चा हो जाता है लेकिन ऐसा तो सभी करते हैं तो हमारा भी मन करता ही है हम सिर्फ जिंदगी में एक ही बार तो जाएंगे तो क्यों मना करती हो। इस पर विमला कहती है नहीं मैंने कह दिया ना कि कोई फालतू खर्चा नहीं करेगा घूमने का मन तो हमारा भी करता है तो क्या हम रोज घूमने ...