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क्रन्तिकारी अशफाक उल्लाह खां एवं रामप्रसाद विस्मिल की साहसिक पहल - full information

क्रन्तिकारी अशफाक उल्लाह खां एवं रामप्रसाद विस्मिल की साहसिक पहल                    भारत के स्वतंत्रता आंदोलन व उसे स्वतन्त्र करने में हिन्दू - मुस्लिम आदि सभी धर्मो के क्रांतिकारियों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता | अहफाक उल्लाह खां हो या विस्मिल ता अन्य कोई क्रन्तिकारी | भारत माँ के ऐसे सच्चे वीर , साहसी , क्रन्तिकारी युवाओं को हम नमन करें उनके बलिदान के सन्देश को न भूलें यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है |  क्रन्तिकारी अशफाक उल्लाह खां और रामप्रसाद बिस्मिल दोनों ही घनिष्ठ मित्र भी थे | दोनों को काकोरी कांड में 19 दिसम्बर 1927 को फांसी दी गयी थी | एक बार शाहजहाँपुर में एकाएक ही हिन्दू - मुस्लिम दंगे भड़क उठे | ऐसे दंगो को क्रन्तिकारी अशफाक उल्ला खां और रामप्रसाद बिस्मिल जैसे देशभक्त भला कैसे सहन कर पाते !        शाहजाहाँ दंगो के मुहाने पर खड़ा सुलग रहा था | दोनों सम्प्रदायों के लोग एक - दूसरे पर घात लगाए घूम रहे थे | यहाँ तक की दोनों पक्षों में से कुछ लोगों को दंगों के दावानल में अपने प्राणो...

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर- full jankari

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर  हमारी सभी कहानी यहाँ से पढ़ सकते हैं पढ़ने के लिए  यहाँ  क्लिक करे  नमस्कार दोस्तों हम आज बताने जा रहे है उस महान व्यक्ति के बारे में जिनका नाम श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर है | नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर बंगाल के प्रसिद्ध कवि , उपन्यासकार , नाटककार , स्वांगकार और दार्शनिक श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था | श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर को बचपन में प्यार से रवि के नाम से पुकारे थे | इन्होने आठ वर्ष की उम्र में ही अपनी प्रथम कविता और सोलह वर्ष में कहानी व नाटक लेखन का कार्य आरम्भ कर दिया |                  ' गीतांजलि ' में वैष्णव कवियों की प्रेम -भावना का अनुपम परिचय दिया गया है | साथ ही उसमे उपनिषदों के सर्वोच्च आध्यात्मिक विचारों का भी बड़ी मार्मिकता से समावेश है | कवि का यह अनूठा ग्रन्थ आध्यात्मिक गगन पर ज्ञान -सूर्य बनकर उदित हुआ है , जिसकी निर्मल ज्योति का प्रकाश समस्त विश्व का हृदय आलोकित कर रहा...

हम सुसंस्कृत बने, संस्कारवान बने

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हम सुसंस्कृत बने, संस्कारवान बने     हमारी सभी कहानी यहाँ से पढ़ सकते हैं पढ़ने के लिए  यहाँ  क्लिक करे  शिस्टाचार मनुष्य का आभूषण है - संस्कारो से वित्त शुध्दि होती है | संस्कृति हमारे अंतस्थ दुष्चिंतन का मार्जन करने की शक्ति का नाम है और संस्कार उसका माध्यम है|  संस्कारों का सर्वाधिक महत्व चित्त -शुद्धि में है | मन की मलीनता ही सबसे अधिक दुखदायी है | काया की मलीनता तो साबुन - पानी से धोयी भी जा सकती है , पर मन तो न जाने कहाँ कहाँ भटकता रहता है और प्रतिपल अशुभ चिंतन के द्वारा प्रदूषित होता रहता है | इन्द्रियों का प्रेरक भी वही है, इसलिए उसी की शुद्धि का निरंतर ध्यान एवं प्रयत्न करना चाहिए | योग सूत्र में चित्तवृत्ति निरोध को योग कहा गया है , जबकि निरोध करना सहज कार्य नहीं है | अतः सर्वप्रथम चित्त को अशुभ से हटाकर सुभप्रवृत्तियो में लगाना चाहिए , क्योंकि चित्त को कुछ न कुछ अवलंबन तो अपेक्षित ही है | यदि उच्चादर्श एवं ध्येय में हम लगे रहेंगे तो बुरी आदतों की ओर हमारा ध्यान नहीं जाएगा | यदि कभी गया भी तो बुरा करने के लिए समय ही न मिलेगा |...

राजा रग की कहानी और राजा दशरथ का जन्म पार्ट - 2

ramayan ki suruaat kahan se hui ? इस्लाम धर्म में और हिन्दू धर्म में गाय की उपयोगिता  राष्ट्रमाता कस्तूरबा दोस्ती से दुश्मनी का खुलाशा  चार अमीर आदमियों की कहानी  नमस्कार दोस्तों ! हमारी सभी कहानी यहाँ से पढ़ सकते हैं पढ़ने के लिए  यहाँ  क्लिक करे  दोस्तों आपने मेरी पिछली पोस्ट तो पढ़ी ही होगी नहीं पढ़ी हो तो आप यहाँ से सीधे पढ़ सकते हो  जिसमे श्रावण कुमार अपने माता पिता को भोजन लेकर जाता है और वहां पर सच्चाई का पता चलता है | तब उसने वो हांड़ी को देखा तो उसमे बीच में पर्दी लगी हुई थी वो समझ गया की ये किसका काम है क्योकि वो जानता था  की उसकी पत्नी ही ऐसा कर सकती है उसने अपनी पत्नी को धक्के देकर बाहर निकल दिया अब श्रवण कुमार अपने माता पिता की सेवा में जुट गया एक दिन उसके माता पिता कहने लगे बेटा हमको तीर्थ यात्रा करने की इक्षा हो रही है हम चाहते है की हम तीर्थ यात्रा पर निकल जाए | श्रवण कुमार ने उनको कहा हे माता हे पिता में जानता हु की तुम बहुत दिनों एक जगह रहकर बहुत बोर हो गए हो लेकिन तुम इस बात की चिंता मत करो में तुमको तीर्थ या...

राजा रग - हिंदी कहानी

ramayan ki suruaat kahan se hui? पार्ट   1 ,    2 हमारी सभी कहानी यहाँ से पढ़ सकते हैं पढ़ने के लिए  यहाँ  क्लिक करे  राजा रग - हिंदी कहानी  नमस्कार दोस्तों में आज एक ऐसी कहानी लेकर आया हु जो बिलकुल सच है कहानी बहुत दिनो पहले की है |किसी राज्य में एक राजा राज्य करता था उसका नाम रग था राजा के कोई संतान नहीं थी राजा इस बात को लेकर चिंता में डूबा हुआ था जिसके कारण वो रोज पंडितो को अपने महल में बुलाकर पोछते रहते थे और उनको दान दक्षिणा देते थे |  एक दिन एक गरीब पंडित उसके महल में पहुंच गया जब वह महल में पंहुचा तो उसने देखा की वह पर बहुत सारे पंडित थे और राजा उनसे पूछ रहे थे की हमारे जीवन में संतान का सुख है या नहीं | मनुष्य का आभूषण  महान व्यक्ति रविन्द्रनाथ टैगोर  अशफाक उल्लाह खां और रामप्रसाद बिस्मिल की गहरी दोस्ती  महान वैज्ञानिक प्रफुल्ल चंद्र राय की जीवनी सत पुरुषो की सादगी एवं निर्भीकता इस्लाम धर्म में और हिन्दू धर्म में गाय की उपयोगिता  पंडितो ने उसको कुछ न कुछ इधर उधर की बातें...