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Purani haveli ka Raj bhag 3

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पुरानी हवेली का राज – भाग 3 पलंग पर बैठी परछाइयों को देखकर अंजलि और टीना की रूह कांप गई। दोनों की टॉर्च की रोशनी जब उन पर पड़ी, तो ऐसा लगा जैसे वे धुंधली हो रही हों। कमरे की हवा अचानक और ठंडी हो गई। "अ…अंजलि, हमें यहां से चलना चाहिए!" टीना ने कांपती आवाज़ में कहा। लेकिन अंजलि की जिज्ञासा अब डर पर भारी पड़ रही थी। उसने धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ाया और कांपती आवाज़ में पूछा, "त…तुम कौन हो?" तभी अचानक कमरे में एक हल्की सी गूंज सुनाई दी, जैसे कोई बहुत दूर से बोल रहा हो— "सालों से… कोई यहाँ नहीं आया… तुम क्यों आई हो?" यह सुनते ही टीना ने अंजलि का हाथ पकड़ा और वापस भागने के लिए मुड़ी, लेकिन तभी दरवाजा अपने आप ज़ोर से बंद हो गया। अब वे दोनों उस रहस्यमयी कमरे में कैद हो चुकी थीं। हवेली का भूतिया रहस्य अचानक एक पुरानी अलमारी खुद-ब-खुद खुल गई, और अंदर एक पुराना, धूल से भरा डायरी रखा था। अंजलि ने डरते-डरते वह डायरी उठाई और खोली। पहले पन्ने पर लिखा था: "यह हवेली हमारी प्रेम कहानी की गवाह है, लेकिन हमारा अंत दर्दनाक था। हमें न्याय चाहिए।" टीना ने कांपत...

chhoti bachchi ki badi kahani-1

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छोटी बच्ची की बड़ी कहानी पार्ट- 1  page 1 2   3 नमस्कार दोस्तों मेरा नाम मनोज कुमार है| में आप सभी को एक ऐसी कहानी की तरफ ले जा रहा हु जो एक पांच साल की छोटी बच्ची की जीवनी है| वह क्या क्या कराती है, दोस्तों आप चोंक जायंगे की वह पांच साल की छोटी बच्ची भी ऐसा कर सकती है| दोस्तों ये कहानी लम्बी जरुर है, लेकिन बोर करने वाली नहीं है| चलो में अब कहानी शुरू करता हु आपका टाइम भी ख़राब नहीं हो | कहानी के पात्र :-   छोटी बच्ची का नाम पूनम है ,लड़की के पिता का नाम रमेश है ,लड़की का भाई जो उसी के बराबर है उसका नाम दीपक है ,लड़की की माँ का नाम सुनीता है यह परिवार एक मिडिल परिवार है, इस कहानी में लड़की का पिता एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है | सुनीता घर का काम संभालती है |पूनम का भाई वेसे तो वो पूनम से छोटा है लेकिन हाईट में पूनम की ही बरावर लगता है | छोटा परिवार है , एक दिन पूनम के पापा यानी रमेश कम्पनी में अधिक काम होने की वजह से लेट आने वाले थे तो उन्होंने घर पर फोन किया की वो कुछ देरी से आयेंगे   तुम सब खाना खा लेना | में कम्पनी में खाकर आऊंगा | पूनम के दिमाग...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-5

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अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। He is a stranger but it seems like a relation of our own. भगवान से प्रार्थना करने के बाद रवि वापस रिया के पास चला गया। और दिन रात उसकी सेवा करने में लग गया उसका पूरा ध्यान रखता और रिया के चक्कर में वह अपना ध्यान रखना तो लगभग भूल ही गया था। और भगवान से बस यही प्रार्थना करता हूं कि भगवान मेरी रिया कि याददाश्त वापस दिला दें। और रवि की दुआ भी रंग लाई रिया को जब 2 दिन बाद होश आया तब उसे थोड़ा थोड़ा सब कुछ याद आने लगा था। उसे बस अभी इतना ही याद था कि वह दोनों घर से पहाड़ी पर दर्शन करने के लिए निकले थे और रास्ते में उनका एक कार एक्सीडेंट हो गया और जिसमें वह दोनों बिछड़ गए और रिया एक नदी में जाकर गिर गई और वह बहने लगी डूबने लगी नदी में फिर उसके बाद में जो कुछ भी हुआ वह भी उसे याद था। पर एक्सीडेंट से पहले की कोई भी बात उसे याद नहीं थी। जब रवि को इस बात का पता चला तो रवि को बहुत खुशी हुई कि कम से कम इसे इतना तो याद आया कि मैं इसका पति हूं और हम दोनों एक कार एक्सीडेंट में बिछड़ गए थे अब भगवान ने चाहा तो धीरे-धीरे करके इसे अपने परिवार के बारे में भी सब कुछ याद आ...

लॉकडाउन में गरीब अपना पेट कैसे भरें। lockdown me gareeb apna pet kese bhare

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लॉकडाउन में गरीब अपना पेट कैसे भरें।  यह कहानी है रामदास की रामदास एक गरीब व्यक्ति था वह अपने परिवार के साथ यह गांव में रहता था उसके परिवार में दो लड़कियां और एक लड़का था और उसकी एक बीमार पत्नी थी। रामदास बहुत ही मेहनती था उसका कोई रोज का कारोबार नहीं था कोई काम नहीं था वह रोज कमाता और रोज खाता था जो काम मिल जाता उसको ही कर लेता था क्योंकि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था तो इसलिए उसे कोई ज्यादा अच्छी नौकरी भी नहीं मिली थी। पर वह अपनी इस जीवनशैली से बहुत ही खुश था वह रोज मेहनत और ईमानदारी की कमाता था और मेहनत और ईमानदारी की ही खाता था और हमेशा खुश रहता था उसकी पत्नी कहने को तो बीमार थी लेकिन अपने पति के साथ पूरे साहस के साथ काम किया करती थी जरा भी महसूस नहीं होने देती थी कि वह बीमार है उसकी दोनों बेटियां बहुत ही प्यारी और मासूम की एक 3 साल की थी और एक 4 साल की 5 साल का एक बड़ा बेटा था। वह इतने करीब थे कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पाए थे लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को अच्छे संस्कार जरूर दिए थे क्योंकि उनका मानना था ज्ञान से बढ़कर संस्कार होते हैं जिससे तीनों बच्चे संस्कारों की इ...

सौतेले पिता ने दिया अपने दो बेटों को अनोखा धन। soutele pita ne diya apne do beton ko anokha dhan

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यह कहानी है  मोहन की। मोहन एक गरीब  किसान था। उसके परिवार में वह सिर्फ अकेला था और कोई भी नहीं था। क्योंकि 2 साल पहले एक हादसे में उसने अपनी  पत्नी और अपने एक बेटे को खो दिया था। दरअसल 2 साल पहले गांव में एक  बाढ़ आई थी और मोहन गांव से बाहर शहर में अपने मामा जी से मिलने उनके घर गया हुआ था पर गांव में अचानक बाढ़ आने से  गांव के लगभग सारे घर तेज बहाव के कारण बह गए थे और कुछ लोग उस गंदे पानी में फस कर मर भी गए थे जिसमें  मोहन की पत्नी और उसका एक बेटा भी शामिल था उसकी पत्नी तो बाढ़ में बह गई थी पर बेटा गंदे पानी में फस कर मर गया था। मोहन को जैसे ही यह शोक समाचार मिला वह जैसा बैठा था वैसे ही दौड़ा-दौड़ा गांव में आया और जब उसने अपना घर देखा तो वहां उसे घर के सिर्फ निशान ही मिल पाए थे। घर कच्चा होने के कारण पानी के तेज बहाव से बह गया था उसकी पत्नी लापता हो गई थी और  बेटे का भी अंतिम संस्कार गांव वालों ने कर दिया था तो अब मोहन करता भी तो क्या सिर्फ रोने के सिवा और कुछ नहीं कर सकता था वह बिलक बिलक कर रोने लगा और खुद भी मरने के लिए सोचने लगा ऐसा सोचते सोचते वह ए...

गीता की बहादुरी और गीता का आत्मविश्वास - हिंदी कहानी 2021

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गीता एक छोटे से गांव में अपने परिवार के साथ रहती थी | उसके परिवार में उसके माता-पिता और उसका एक बड़ा भाई आनंद था। वह अपने परिवार में बहुत खुशी से रहते थे | गीता अपने बड़े भाई  आनंद से बहुत डरती थी  क्योंकि वह उससे उम्र में बड़ा था  और माता-पिता भी गीता की बातों से ज्यादा आनंद की बातों को ही महत्व देते थे  | इसीलिए गीता को लगता था कि उसकी कोई बात नहीं सुनता और वह अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाती थी  जिस कारण वह अपने आप को बहुत डरा हुआ और अकेला महसूस करती थी। पर वह पढ़ने लिखने वाली लड़की थी तो वह विद्यालय जाती थी |  उसे विद्यालय में कुछ लड़के बहुत दिनों से तंग कर रहे थे लेकिन उसने घर में इसीलिए नहीं बताई की ना जाने माता-पिता क्या सोचते हैं शायद वह यह ना सोचें कि लड़कों से वह भी कोई संबंध रखती है | इसीलिए उसको देखकर और लड़के भी उसे तंग कर रहे थे | अपने भाई से कहना चाहती थी लेकिन डर के कारण वह नहीं कह पाई एक दिन वह अपने विद्यालय जा रही थी तो रास्ते में उसे वही लड़के तंग करने लगे वह वहां से निकल गई आगे चौराहे पर जाकर उससे उसका भाई मिल गया उसे लगा कि वह उसे यू...

कोमल की टाइम ट्रेवल एडवेंचर: एक आठ साल की लड़की की भविष्य में यात्रा

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नमस्कार दोस्तों क्या हाल है दोस्तों मैंने बहुत दिनों से कोई स्टोरी नहीं पोस्ट की उसके लिए में माफ़ी चाहता हूँ क्युकी लाइफ में उतार चढाव भी बहुत आते है   ये तो जिन्दगी का फंडा है | अब स्टोरी पे आता हूँ  time traval story  ये स्टोरी बहुत एडवांस है, इसमें एक लड़की होती है, जिसका नाम कोमल है | कोमल एक आठ साल की लड़की है और वह स्कूल जाती है कोमल के पिता का नाम महेंद्र है | जब कोमल स्कूल जाती है उसकी टीचर उसको बहुत प्यार करती है और उसको बहुत अच्छे से पढ़ाती है क्युकी कोमल बहुत होशियार लड़की है उसका पढाई में बहुत मन लगता है | वह पढाई में बहुत तेज है उसका दिमाग बहुत फ़ास्ट चलता है और वह सब बच्चियो से बिलकुल अलग है | कोमल कभी कोई शरारत नहीं करती इसलिए उसको सभी बहुत प्यार से बोलते है और उसके साथ अच्छे से पेश आते है | एक दिन कोमल स्कूल से घर आ रही थी कोमल स्कूल से पैदल चलकर घर तक आती है वह स्कूल से घर आ रही थी उसके रस्ते में जंगल भी पड़ता है तो वह जगल से गुजर रही थी उसने कुछ ऐसा देखा की उसको देखकर वह दंग रह गई लेकिन कुछ देख तक देखने तक वह चीज गायब हो गई | कोमल अपने घर आ गयी घर आकर...

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मन में बचपन की बातें 2

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मन में बचपन की बातें 2 पार्ट -    1       2        3         4     आपने पढ़ा..  पूरे स्कूल के बच्चे बिठा दिये और मुझे और अभिषेक को खड़ा रखा | और कहा अब बताओ क्या परेशानी है | मैं तो चुप रहा अभिषेक बोला सर मनोज से पूछो क्या बात है | अब तो अभिषेक भी बिठा दिया | अब तो डाट मुझे ही पड़ी थी | हमारी पिछली पोस्ट पढने के लिए यहाँ क्लिक करें अब आगे ... यहाँ से आगे तो हम धीरे धीरे कक्षा 8 में पहुंचे | उस वक्त कक्षा 8 बोर्ड हुआ करती थी | तो हम पढाई में जुट गे | इसके बाद कक्षा 8 की परीक्षा देने के बाद हमारा रिजल्ट आया तो उसमे रिजल्ट था की कक्षा में पहला स्थान था अभिषेक और दूसरा स्थान था मनोज मतलब मेरा और तीसरा स्थान बईसन चौथा पूनम का और पंचमा वर्षा का ऐसे ही सचिन का और मुन्ना का नहीं पता था | हम एक नई कक्षा 9 वी  में पहुंचे उसमे एक टोपर लड़की आई जिसका नाप प्रयंका था |  हम तो थे ही शरारती हमारी फिरसे वही धुन चालू लेकिन बईसन उधम कम करती या कहे न के बराबर जो ज्यादा उधम करते वह मनो...