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साया का शहर: प्रधानमंत्री पर साजिश, ब्लैक किंग का राज और अर्जुन की बहादुरी (एपिसोड 4)

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कहानी का नाम: "साया का शहर" एपिसोड 4: साजिश की परतें और नई चुनौती  अगर आपने पिछला एपिसोड नहीं पढ़ा है तो पहले उसे पढ़ लीजिए  अगर पढ़ लिया है तो कहानी शुरू करते हैं पिछले एपिसोड में अर्जुन ने अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया और कई बड़े अपराधियों को गिरफ्तार कराया, लेकिन विक्रम एक बार फिर भाग निकला। अब अर्जुन को समझ आ गया था कि यह लड़ाई सिर्फ अपराधियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उस भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ भी है जो इनको बढ़ावा देता है। अब आगे... विक्रम ने अपनी हार का बदला लेने के लिए एक खतरनाक योजना बनाई। उसने देश के प्रधानमंत्री पर हमला करने का प्लान तैयार किया। इस बार विक्रम ने हाई-टेक ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने वाले विदेशी विशेषज्ञों को अपने साथ जोड़ा। उसका मकसद सिर्फ प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि देश में अराजकता फैलाना भी था। दूसरी तरफ, अर्जुन को इस साजिश की भनक एक गुप्त सूत्र से लगी। उसने तुरंत अपने पुराने पुलिस मित्र अंशुमान को इसकी जानकारी दी। लेकिन इस बार विक्रम ने अपनी साजिश को इतना गुप्त रखा था कि पुलिस भी उसे रोकने में नाकाम ...

किसी की औकात उसके कपड़ों से नहीं, मेहनत और हुनर से तय होती है – प्रेरणादायक कहानी

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किसी की औकात उसके कपड़ों से नहीं, मेहनत और हुनर से तय होती है – प्रेरणादायक कहानी रमेश एक गांव में रहने वाला बहुत ही होशियार और समझदार और बहुत ही पढ़ा-लिखा लड़का था उसका एक परिवार था जो गांव में ही रहता था। और वह उसी परिवार के साथ गांव में रहता था। रमेश को पढ़ना और  पढ़ाना बहुत ही पसंद था लेकिन उसके इतने गरीब हालात थे कि रमेश अपनी मनचाही पढ़ाई पूरी नहीं कर सकता था। इसलिए उसने सोचा कि क्यों ना मैं शहर चला जाऊं वही कुछ काम करूंगा और जो पैसे मिले करेंगे उन्हीं से मैं अपनी पढ़ाई भी पूरी कर लूंगा जब तक मेरी इच्छा पूरी नहीं होती मैं गांव नहीं आऊंगा। रमेश को पढ़ाई में सबसे ज्यादा कंप्यूटर से लगाव था।  उसने गांव में रहकर कंप्यूटर सीखा कंप्यूटर के बारे में जाना और कंप्यूटर से जुड़ी हर एक चीज उसे पता थी। इसलिए वह शहर आ गया और सोचने लगा कि अब मैं कौन सी नौकरी करूंगा यहां रहकर।  उसने सोचा कि क्यों ना मैं शहर में रहकर कोई कंप्यूटर की जॉब ढूंढ लूं उससे मेरा काम और आसान हो जाएगा क्योंकि जो काम पहले से आता है अगर उसी को आगे बढ़ाया जाए तो कोई परेशानी नहीं होती इसीलिए वह शहर में स्थित जितन...

ईमानदारी, लगन और सच्चाई की मिसाल: अंजलि की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

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 अंजली एक आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकान पर काम करती है। उसकी तनख्वाह भी सीमित थी। वैसे तो अंजलि को ज्वेलरी पहनने का कोई शौक नहीं था।    लेकिन जिस दुकान पर वह काम करती थी उस दुकान पर उसे एक मोतियों का हार बहुत पसंद आया था। उसकी कीमत भी 30,000 थी  क्योंकि वह असली मोतियों का हार था। इसलिए उनमें चमक बहुत अच्छी थी और मोतियों की चमक से ही अंजलि को वह मोतियों का हार बहुत पसंद आया था। लेकिन वह उसे खरीद नहीं सकती थी क्योंकि जितनी उसकी कीमत थी  वह अंजलि के लिए बहुत ज्यादा थी। अंजलि अपनी तनखा में से ₹30 भी नहीं बचा पाती थी तो इतना महंगा हार कैसे खरीद लेती लेकिन अंजलि ने सोचा की कोशिश करने से सब कुछ हो सकता है मुझे बचत करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर पैसे बच जाया करेंगे तो उन पैसों को जोड़कर मैं कभी ना कभी  हार खरीद ही लूंगी। अब अंजलि अपनी तनखा में से कुछ पैसे बचाने की कोशिश करती लेकिन महीना खत्म होने तक उसके पास कुछ भी नहीं बच पाता था। अंजलि की लाख कोशिश के बावजूद भी कोई बचत।नहीं हो पाती थी। अंजलि परेशान रहने लगी की ऐसे तो मैं अपने लिए कभी कुछ नहीं खरीद पाऊंगी। कभी अपनी ...