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पुरानी हवेली का रहस्य: एक भावुक और रहस्यमय कहानी

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 इस कहानी का पिछला भाग के लिए यहाँ क्लिक करें कहानी: पुरानी हवेली का रहस्य करण के माता-पिता ने जैसे ही करण को घर लौटते देखा, वे खुशी से चिल्लाने लगे, "हमारा बेटा आ गया!" लेकिन करण उनकी तरफ बढ़ने के बजाय मोहन के पीछे छिप गया। यह देखकर करण के माता-पिता हैरान रह गए। उन्होंने सोचा कि करण ने जिनके साथ समय बिताया, उन्होंने उस पर ज़ुल्म किए होंगे, जिससे वह अब हमसे भी डर रहा है। लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि करण को सच पता चल चुका है—वे उसके असली माता-पिता नहीं हैं। करण के माता-पिता ने उसे प्यार से बुलाया और अंदर ले गए। उन्होंने मोहन को भी धन्यवाद देते हुए अंदर बुलाया, क्योंकि उन्हें लगा कि मोहन ही करण को वापस लाया है। रात को करण के माता-पिता उसे अपने पास सुलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन करण अकेले सोने की ज़िद करता है। यह सुनकर वे घबरा गए, लेकिन मोहन ने उन्हें समझाया कि करण अब बच्चा नहीं रहा। वह उसके कमरे की निगरानी रखेगा। आखिरकार, करण के माता-पिता मान गए। रात को करण अपने कमरे में बेचैन होकर लेटा था। तभी मोहन चुपके से उसके कमरे में आया और पूछा, "अब बताओ, तुम्हें...

साया का शहर: प्रधानमंत्री पर साजिश, ब्लैक किंग का राज और अर्जुन की बहादुरी (एपिसोड 4)

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कहानी का नाम: "साया का शहर" एपिसोड 4: साजिश की परतें और नई चुनौती  अगर आपने पिछला एपिसोड नहीं पढ़ा है तो पहले उसे पढ़ लीजिए  अगर पढ़ लिया है तो कहानी शुरू करते हैं पिछले एपिसोड में अर्जुन ने अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया और कई बड़े अपराधियों को गिरफ्तार कराया, लेकिन विक्रम एक बार फिर भाग निकला। अब अर्जुन को समझ आ गया था कि यह लड़ाई सिर्फ अपराधियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उस भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ भी है जो इनको बढ़ावा देता है। अब आगे... विक्रम ने अपनी हार का बदला लेने के लिए एक खतरनाक योजना बनाई। उसने देश के प्रधानमंत्री पर हमला करने का प्लान तैयार किया। इस बार विक्रम ने हाई-टेक ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने वाले विदेशी विशेषज्ञों को अपने साथ जोड़ा। उसका मकसद सिर्फ प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि देश में अराजकता फैलाना भी था। दूसरी तरफ, अर्जुन को इस साजिश की भनक एक गुप्त सूत्र से लगी। उसने तुरंत अपने पुराने पुलिस मित्र अंशुमान को इसकी जानकारी दी। लेकिन इस बार विक्रम ने अपनी साजिश को इतना गुप्त रखा था कि पुलिस भी उसे रोकने में नाकाम ...

मां का आखिरी खत। maa ka aakhri khat

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मां का आखिरी खत। यह कहानी है एक लड़के की जिसका नाम सोनू था। जिसकी मां ने अपने बेटे के लिए इतनी बड़ी कुर्बानी दे दी जिसके लिए वह सपने में भी नहीं सोच सकता था और फिर भी वह लड़का अपनी मां को अपनी बदकिस्मती मानता था उनके साथ नहीं जाता नहीं था क्योंकि लोग उसका और उसकी मां का मजाक उड़ाते थे तो उसे लगता था कि वह मेरा मजाक मेरी मां की वजह से ही उड़ाते हैं अगर मैं मां के साथ कहीं नहीं जाऊंगा तो मेरा भी मजाक नहीं बनेगा। दरअसल हुआ कुछ यूं था। कि जब सोनू की मां ने सोनू को जन्म दिया था उसके 2 साल बाद ही। सोनू का एक एक्सीडेंट हो गया था। उसमें उसकी एक आंख और एक किडनी दोनों ही खराब हो गए थे और दोनों को ही बदलने की जरूरत थी। तब उसकी मां ने अपनी आंख और अपनी किडनी अपने बेटे को दे दी। किडनी से तो किसी को फर्क नहीं पड़ता था जिनको नहीं पता था उन्हें पता भी नहीं चलता था कि इसकी एक किडनी नहीं है लेकिन आंख तो साफ-साफ दिख ही जाती थी इसलिए सब उसे एक आंख की अंधी कहकर पुकारते थे। और जब सोनू और उसकी मां कही साथ जाया करते थे। सब लोग कहते थे कि देखो एक आंख की आंधी के साथ उसका बेटा जा रहा है। यह सुनकर  सोनू को बहु...

हमारा डर ही हमारे दुश्मनों को हिम्मत देता है। hamara dar hi hamare dushmanon ko himmat deta hai

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 हमारा डर ही हमारे दुश्मनों को हिम्मत देता है। एक सुनसान रोड पर एक मासूम लड़की जिसका नाम दृष्टि था वह बेसुध होकर भागी ही जा रही थी। और उसके पीछे चार-पांच लड़के भी दौड़े जा रहे थे। और वह उन्हीं लड़कों से अपना पीछा छुड़ाने के लिए इस कदर भाग रही थी कि उसे अपने कपड़ों का भी होश नहीं था।  लेकिन वह लड़के उसके पीछे क्यों भाग रहे थे क्या राज था। दरअसल हुआ कुछ यूं था कि दृष्टि एक बहुत ही बड़े घराने की लड़की थी और वह अपने पिता के पैसों पर भी कभी-कभी एक कर लिया करती थी। और उसका एक प्रेमी भी था जिसका नाम वीर था। वीर और दृष्टि 2 साल से एक दूसरे को जानते थे और इसीलिए हम दोनों में काफी गहरा प्यार भी था। लेकिन वह कभी एक दूसरे से खुलेआम नहीं मिलते थे हमेशा चुप कर ही मिलते थे।  और वह इसीलिए कभी-कभी गर्ल्स बार में भी जाया करती थी। जहां उसकी मौज मस्ती भी हो जाती थी और वहां अपने वीर को बुलाकर उससे मुलाकात भी कर लिया करती थी। 1 दिन हुआ कुछ यूं था कि जब दृष्टि गर्ल्स बार में अपनी सहेलियों के साथ मौज मस्ती कर रही थी। तब अचानक उसके फोन पर वीर का फोन आया और दृष्टि  ने अकेले में जाकर वीर से बा...

सौतेली मां का छुपा खजाना। souteli maa ka chhupa khajana

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सौतेली मां का छुपा खजाना। यह कहानी है विमला की। विमला पहले से ही शादीशुदा थी पर विधवा की शादी के 2 साल बाद ही उसके पति एक एक्सीडेंट में गुजर गए थे। और वह अकेली रहा करती थी। दूसरी तरफ मोहन। जो विमला का सगा भाई था विमला के लिए हमेशा परेशान रहता था। वह सोचता था। की जिंदगी अकेले तो नहीं गुजारी जा सकती। मुझे अपनी बहन का अकेलापन कैसे भी करके दूर करना ही होगा।  इसीलिए वह विमला से रोज किसी न किसी रिश्ते की बात करता रहता था लेकिन विमला मना कर दिया करती थी। विमला कहती थी कि मेरे पति की जगह कोई नहीं ले सकता वह भले ही मेरी जिंदगी में नहीं रहे लेकिन मेरी यादों में हमेशा रहेंगे। यह सुनकर मोहन अपनी बहन से कहता है देखो बहन जीजा जी को गुजरना था।  वह गुजर गए तुम्हारे सामने तुम्हारी पूरी जिंदगी है और यह जिंदगी ऐसे ही नहीं गुजारी जा सकती तुम तो जानती ही हो अकेली महिला को यह समझ जीने नहीं देता और ऊपर से तुम  विधवा भी हो पता है लोग कैसी कैसी बातें बनाते हैं। इस पर विमला ने कहा मुझे फर्क नहीं पड़ता लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं बस मुझे अकेला रहना है।  मोहन रोज अपनी बहन से एक ही बात कहता ...

chhoti bachchi ki badi kahani-1

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छोटी बच्ची की बड़ी कहानी पार्ट- 1  page 1 2   3 नमस्कार दोस्तों मेरा नाम मनोज कुमार है| में आप सभी को एक ऐसी कहानी की तरफ ले जा रहा हु जो एक पांच साल की छोटी बच्ची की जीवनी है| वह क्या क्या कराती है, दोस्तों आप चोंक जायंगे की वह पांच साल की छोटी बच्ची भी ऐसा कर सकती है| दोस्तों ये कहानी लम्बी जरुर है, लेकिन बोर करने वाली नहीं है| चलो में अब कहानी शुरू करता हु आपका टाइम भी ख़राब नहीं हो | कहानी के पात्र :-   छोटी बच्ची का नाम पूनम है ,लड़की के पिता का नाम रमेश है ,लड़की का भाई जो उसी के बराबर है उसका नाम दीपक है ,लड़की की माँ का नाम सुनीता है यह परिवार एक मिडिल परिवार है, इस कहानी में लड़की का पिता एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है | सुनीता घर का काम संभालती है |पूनम का भाई वेसे तो वो पूनम से छोटा है लेकिन हाईट में पूनम की ही बरावर लगता है | छोटा परिवार है , एक दिन पूनम के पापा यानी रमेश कम्पनी में अधिक काम होने की वजह से लेट आने वाले थे तो उन्होंने घर पर फोन किया की वो कुछ देरी से आयेंगे   तुम सब खाना खा लेना | में कम्पनी में खाकर आऊंगा | पूनम के दिमाग...

एक दुखद प्रेम कहानी: सच्चे प्यार की दर्दनाक दास्तान"

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कहानी शीर्षक: "एक दुखद प्रेम कहानी: सच्चे प्यार की दर्दनाक दास्तान" कहानी: मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी में ऐसा दिन आएगा जब मैं अपने सच्चे प्यार से बिछुड़ जाऊंगा। लेकिन यही हुआ। मेरी प्रेम कहानी एक दुखद प्रेम कहानी बन गई। मैंने अपने प्रेमी से पहली बार कॉलेज में मिला था। हम दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे। मैंने उसे पहली बार देखा तो मुझे लगा कि वह मेरा दिल चुरा लेगा। उसकी मुस्कान में एक अजीब सी जादू था जो मुझे उसकी ओर खींचता था। हम दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे के करीब आए। हमने एक दूसरे को अपने दिल की बातें बताईं। मैंने उसे अपने सपनों के बारे में बताया। उसने मुझे अपने सपनों के बारे में बताया। लेकिन हमारे प्यार को हमारे परिवार ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने हमें अलग करने की कोशिश की। लेकिन हमने हार नहीं मानी। हमने एक दूसरे के साथ रहने का फैसला किया। लेकिन किस्मत ने हमारे साथ धोखा किया। मेरे प्रेमी को एक दिन एक दुर्घटना में जान से मारा गया। मैं उस दिन अपने दिल को तोड़ दिया था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपने प्रेमी के बिना जी पाऊंगी। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने अपने प...

Ajnavi hai par lagta hai apna sa rista Part-2

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अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता।  Part-2 अगर आपने इस कहानी का पार्ट 1 नहीं पढ़ा हो तो आप नीचे क्लिक करके उस पार्ट-1  को भी पढ़ लो  अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता।-पार्ट-1 साधु की कुटिया से रिया मेले में पहुंचती है और उधर से रवि अपने घर से मेले में पहुंचता है। और साथ में रवि के दिल में यह उम्मीद भी होती है कि शायद आज इस मेले में मुझे मेरी खोई हुई रिया मिल जाए। रवि धीरे-धीरे करके मेले में अपनी रिया को ढूंढने लगता है। वह धीरे धीरे कर के मेले में आगे बढ़ता चला जाता है।  मेला काफी बड़ी जगह में लगा हुआ था। इसलिए रवि को बहुत ही परेशानी हो रही थी इतने बड़े मेले में रिया को ढूंढने में। रवि को पता नहीं था कि रिया उसे मेले में मिलेगी भी या नहीं। बस वह अपने दिल की बात मानकर रिया को मेले में ढूंढे जा रहा था। क्योंकि उसका दिल बार-बार कह रहा था कि आज इस मेले में उसकी रिया उसे मिलने वाली है। इधर रिया सारी बातों से अनजान और बेफिक्र होकर मेले में घूम रही थी और आनंद ले रही थी। तभी रास्ते में रिया को एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर दिखाई दिया। उस मंदिर को देखते ही रिया को साधु की कही ...

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। koshis karne walon ki kabhi haar nahin hoti

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 कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह कहानी है राजेश की राजेश एक गांव का पढ़ा-लिखा और सुंदर लड़का था। और उसका बचपन से ही सपना था कि वह शहर में जाकर अपना एक बिजनेस करें। जिससे वह अपने परिवार को सारे सुख दे सकें। और इसीलिए वह बचपन से ही बहुत मन से पढ़ाई करता रहा। और पढ़ाई के साथ-साथ इंग्लिश भी सीखता रहा क्योंकि वह जानता था कि अगर शहरों में बिजनेस करना है तो इंग्लिश भाषा आनी बहुत ही जरूरी है।  इसलिए वह इंग्लिश भी अच्छे से जानता था। अब धीरे-धीरे करके समय बीतता गया उसकी पढ़ाई पूरी हो गई। तब उसने सोचा मेरी पढ़ाई पूरी हो गई है तो क्यों ना मैं शहर जाकर अब बिजनेस करने की कोशिश करूं। लेकिन उसके लिए मुझे कुछ दिन किसी बिजनेसमैन के साथ नौकरी करनी पड़ेगी ताकि मैं समझ सकूं कि बिजनेस कैसे होता है। उसके लिए मुझे किसी बिजनेसमैन के वहां मैनेजर की नौकरी  करनी होगी।  क्योंकि दूसरे के बताने और खुद के सीखने से जमीन आसमान का फर्क होता है खुद के सीखने से तजुर्बा बहुत अच्छा हो जाता है और किसी भी काम को करने के लिए तजुर्बे की बहुत जरूरत होती है।  ऐसा सोचकर वह गांव से शहर के लिए निकल ...

बूंद बूंद से सागर भरता है: योगेश की प्रेरक कहानी

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  बूंद बूंद से सागर भरता है: योगेश की प्रेरक कहानी यह कहानी है योगेश जी की योगेश एक बहुत ही अच्छा पढ़ा लिखा और समझदार लड़का था वह बहुत मेहनत करता था छोटी उम्र में ही उसने अपनी जिम्मेदारियों को समझा और बहुत अच्छे से निभाया क्योंकि उसके पिताजी उसके जन्म के एक साल बाद ही गुजर चुके थे अब वह अपनी एक बूढ़ी मां और अपनी एक छोटी बहन के साथ में रहता था | उसकी बहन का नाम मीना था मीना भी बहुत ही सुंदर होशियार लड़की थी वह भी मां को घर में कुछ भी नहीं करने देती थी और सारा घर का काम खुद ही करती थी इस तरह दोनों बहन भाई अपनी अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभा रहे थे और खुशी-खुशी अपना जीवन बिता रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे मीना बड़ी हो रही थी वैसे वैसे ही योगेश की चिंता भी बढ़ रही थी कि अब मीना बड़ी हो रही है तो फिर उसकी शादी भी करनी होगी और शादी करने के लिए तो मेरे पास पैसे ही नहीं है और मैं चाहता हूं मेरी बहन ने इतने दुख उठाए हैं बचपन से लेकर अब तक तो शादी के बाद किसी अच्छी  इज्जतदार और रईस ससुराल में जाए जिससे वह पूरी जिंदगी अच्छे से गुजार पाए। लेकिन उसके लिए पैसा भी बहुत चाहिए जो मेरे पास नहीं है मैं...

दोस्ती की आड़ में धोखा। dosti ki aad me dhokha

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दोस्ती की आड़ में धोखा। रवि और दिनेश की। दिनेश गांव से शहर में कॉलेज में पढ़ने के लिए गया था। तभी वहां उसकी मुलाकात रवि से हुई। रवि भी पढ़ाई लिखाई में अच्छा था। और कॉलेज में 1 साल पुराना भी हो गया था। और दिनेश को रवि का स्वभाव भी अच्छा लगा तो दोनों में थोड़ी बहुत बातचीत शुरू हो गई। दोनों कभी कभी साथ में बैठ जाते तो कभी कभी अलग बैठ जाते  थे। इसीलिए कॉलेज के लोगों को समझ में नहीं आता था कि इन दोनों में दोस्ती है भी या नहीं। क्योंकि अगर दो लड़के पास में बैठते हैं और आपस में हंसी मजाक बातचीत करते हैं तो दूसरे लोगों उसे दोस्ती का नाम ही देते हैं। और अगर वही दो लड़के हंसते बोलते अचानक अलग-अलग बैठ जाएं दूर हो जाएं तो लोगों को थोड़ा कंफ्यूजन हो जाता है। कुछ ऐसा ही था रवि और दिनेश के साथ।  दरअसल दिनेश को हंसी मजाक मौज मस्ती यह सब पसंद नहीं था यह सब उसे एक हद तक ही पसंद था अगर ज्यादा यह सब हो जाए तो उसे यह सब सिर्फ समय की बर्बादी ही लगती थी। इसीलिए वह रवि से थोड़ा दूरी बनाकर ही रखता था क्योंकि रवि पड़ता कम था लेकिन हंसी मजाक चुटकुले बाजी बहुत ही करता था। इसीलिए वह पढ़ाई में भी ज्यादा अच...

कंजूस सास की कंजूसी होशियार बहू ने खत्म करी। kanjoos saas ki kanjusi hoshiyaar bahu ne khatm kari

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  कंजूस सास की कंजूसी होशियार बहू ने खत्म करी।  kanjoos saas ki kanjusi hoshiyaar bahu ne khatm kari   विमला एक बहुत ही कंजूस औरत थी। उसका एक बेटा था गोपाल और उसकी पत्नी राधा थी। राधा और गोपाल की शादी को 1 साल हो गया था लेकिन विमला ने अपने कंजूसी के चलते उन्हें कहीं बाहर घूमने के लिए नहीं भेजा था वह चाहते थे कि हम भी औरों की तरह घूमने जाएं लेकिन विमला कहती थी कि बाहर घूमने जाने का क्या फायदा बेकार पैसा ही खर्च होगा गांव में एक से एक अच्छी जगह है वहां जाकर घूम आओ। तुम्हें अकेले ही घूमने जाना है तो अकेले जाओ कोई नहीं जाएगा तुम्हारे साथ में लेकिन फालतू पैसा बर्बाद मत करो। इस पर गोपाल ने कहा हां मां मैं समझता हूं कि सिर्फ दूसरों की होड़ करना दूसरों की होड़ करते हुए कहीं खर्चीली जगह पर जाना दो-तीन दिन रुक के आना बहुत ही खर्चा हो जाता है लेकिन ऐसा तो सभी करते हैं तो हमारा भी मन करता ही है हम सिर्फ जिंदगी में एक ही बार तो जाएंगे तो क्यों मना करती हो। इस पर विमला कहती है नहीं मैंने कह दिया ना कि कोई फालतू खर्चा नहीं करेगा घूमने का मन तो हमारा भी करता है तो क्या हम रोज घूमने ...