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कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। koshis karne walon ki kabhi haar nahin hoti

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 कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह कहानी है राजेश की राजेश एक गांव का पढ़ा-लिखा और सुंदर लड़का था। और उसका बचपन से ही सपना था कि वह शहर में जाकर अपना एक बिजनेस करें। जिससे वह अपने परिवार को सारे सुख दे सकें। और इसीलिए वह बचपन से ही बहुत मन से पढ़ाई करता रहा। और पढ़ाई के साथ-साथ इंग्लिश भी सीखता रहा क्योंकि वह जानता था कि अगर शहरों में बिजनेस करना है तो इंग्लिश भाषा आनी बहुत ही जरूरी है।  इसलिए वह इंग्लिश भी अच्छे से जानता था। अब धीरे-धीरे करके समय बीतता गया उसकी पढ़ाई पूरी हो गई। तब उसने सोचा मेरी पढ़ाई पूरी हो गई है तो क्यों ना मैं शहर जाकर अब बिजनेस करने की कोशिश करूं। लेकिन उसके लिए मुझे कुछ दिन किसी बिजनेसमैन के साथ नौकरी करनी पड़ेगी ताकि मैं समझ सकूं कि बिजनेस कैसे होता है। उसके लिए मुझे किसी बिजनेसमैन के वहां मैनेजर की नौकरी  करनी होगी।  क्योंकि दूसरे के बताने और खुद के सीखने से जमीन आसमान का फर्क होता है खुद के सीखने से तजुर्बा बहुत अच्छा हो जाता है और किसी भी काम को करने के लिए तजुर्बे की बहुत जरूरत होती है।  ऐसा सोचकर वह गांव से शहर के लिए निकल ...

मीना ने देश पर शहीद होकर अपने गांव का नाम रोशन किया | meena ne desh par shaheed hokar apne gaanv kaa naam roshan kiya

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  मीना ने देश पर शहीद होकर अपने गांव का नाम रोशन किया |  यह कहानी है एक 10 साल की मीना की। वह अपने माता पिता और अपने एक 15 साल के भाई के साथ गांव में अपने परिवार में रहती थी। वैसे तो मीना को पढ़ना बहुत पसंद था लेकिन पढ़ने से भी ज्यादा उसे बड़े-बड़े सपने देखना पसंद था। उसे जब भी पढ़ाई से वक्त मिलता वह बड़े-बड़े सपने देखने लगती। लेकिन जब वह 12 साल के हुई तो उसे थोड़ा समझ में आया कि हजार सपने देखने से कुछ नहीं होता एक ही सपना देखो उसी को सच करने में लग जाओ तब ही सपना सच होता है। तभी सच्ची खुशी मिलती है हजार सपने देखने से खुशी तो मिलेगी पर वह सच्ची खुशी नहीं होगी। अब मीना ने सोच लिया कि वह भी आईएएस में भर्ती होगी और अपने देश की रक्षा करेगी और अपने गांव अपने देश अपने माता पिता अपने भाई का नाम रोशन करेगी। लेकिन वह गांव में रहती थी तो गांव में रहकर भी उसके माता-पिता उसे पढ़ा तो रहे थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि मीना आईएएस बनना चाहती है तो वह डर गए कि गांव में तो लड़कियों को इतनी भी छूट नहीं कि वह मां-बाप से बिना पूछे बाजार चली जाए और ऐसा तो वह पूछ कर भी कभी नहीं कर सकती। वह मी...

आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक। aalsi kisaan ko sikhaya uske bete ne sabak

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आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक।   यह कहानी है रामू की रामू एक गांव में रहता था वह एक किसान था वह एक बहुत ही आलसी किसान था क्योंकि उसके खेत तो बहुत थे।लेकिन वह उनमें कुछ काम नहीं करता था सिर्फ दिन भर सोता रहता था   खेतों में फसल की उगाई और उसकी देखरेख के लिए खेतों में नौकर छोड़ रखे थे और उन नौकरों पर सिर्फ हुकुम चलाता रहता था। कभी खेतों में जाकर भी नहीं देखता था क्योंकि उसे डर था की अगर मैं खेतों में गया तो मुझे काम करना पड़ेगा जिसके कारण मैं सो नहीं पाऊंगा।  रामू की इस आदत का खेतों में लगे नौकर बहुत फायदा उठाते थे। वह अच्छी फसल उगाते तो थे उन्हें बाजार में  बेचकर भी आते थे। और उसके बहुत अच्छे दाम भी मिलते थे लेकिन वह रामू किसान को सिर्फ उसके आधे पैसे ही देते थे। आधे पैसे नौकर आपस में बांट लिया करते थे। और जो पैसे वह रामू किसान को देते थे उसमें से भी अपनी पगार मांग लिया करते थे। और रामू को ना चाहते हुए भी नौकरों को पगार देनी पड़ती थी क्योंकि वह समझता था कि फसल बेचकर यही पैसे आए हैं और इसमें से मुझे इन्हें पगार देनी ही पड़ेगी वरना यह काम नहीं करेंगे।...

chhoti chidiya ki kahani hindi story in india

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छोटी चिड़िया की कहानी हिंदी स्टोरी  होम  पर जाये  नमस्कार दोस्तों मेरा नाम मोहन है में राजस्थान का रहने वाला हूँ मुझे हिंदी कहानी लिखने का बड़ा शॉक है | इसलिए में आप लोगो को पढ़ने के लिए कहानी लिखते रहता हूँ | आज की कहानी एक छोटी चिड़िया की कहानी है | इस कहानी में छोटी चिड़िया बहुत दुखी रहती है | आखिर में उसका दुःख एक कटफोवड़ा दूर करता है | दोस्तों अब कहानी शुरू करता हूँ | दोस्तों कहानी पूरी पढ़ना है तभी आपको कहानी पढ़ने में मजा आएगा | एक जंगल में एक  बहुत पुराना पेड़ था जिस पर  पक्षियों के घोंसले थे | उसी पेड़ पर एक छोटी सी चिड़िया का घोंसला बना हुआ था वह चिड़िया दिन भर अपना पेट भरकर शाम को अपने घोसले में आ जाती थी | एक दिन उस चिड़िया ने दो अंडे दिए अब चिड़िया बहुत खुश थी अचानक से वह पेड़ जोर जोर से हिलने लगा | तभी उस छोटी चिड़िया के घोसले से एक अंडा नीचे गिर गया | चिड़िया ने जब नीचे देखा तो उसका अंडा जमीन पर गिरकर टूट गया | और उसने देखा की जिस पेड़ पर उसका घोसला बना हुआ था उस पेड़ को एक हाथी हिला रहा था | जिसके कारण वह अंडा गिर गया था चि...

बैन बादशाह सहजादी की कहानी - full story

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बैन बादशाह सहजादी  नमस्कार दोस्तों आज में एक बैन बादशाह की सहजादी द्वारा सुनाई हुई कहानी बताने जा रहा हूँ कहानी  पुराने ज़माने की है  एक राज्य में एक राजा राज करता था | राजा की सात रानी थी  लेकिन किसी भी रानी के एक भी लड़का या लड़की नहीं थी | राजा इस चिंता में डूबा हुआ था अगर उसके एक भी संतान नहीं होगी तो राजगद्दी खाली रह जायेगी | इस चिंता को लेकर राजा एक और रानी की तलास में निकल पड़ा यानी राजा आठवी रानी करने के लिए चल दिया | रास्ते में उसे एक लड़की ने आवाज लगाई  राजा ने पीछे मुड़कर देखा तो वह लड़की बीरसिंह जाट की पुत्री थी |  राजा ने पुछा  क्या बात है  तो लड़की बोली महाराज सुना है आप आठवी रानी की तलाश में जा रहे हो | राजा कहने लगा आपने ठीक सुना है, में आठवीं रानी की तलाश में जा रहा हूँ | लड़की ने कहा  मुझे आप अपनी रानी बना लीजिये क्योकि मुझे एक लड़का और एक लड़की पैदा  होने का वरदान मिला है | राजा ने कहा अगर ऐसा नहीं हुआ तो ? लड़की बोली अगर ऐसा नहीं हुआ तो आप मुझे जो चाहे सजा दे सकते हो | राजा ने कहा ठीक है में आपसे विवाह  करने के लिए तैय...

बैन बादशाह सहजादी की कहानी पार्ट - 2

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बैन बादशाह सहजादी - 2    पेज - 1    २  आपने पिछली पोस्ट में पढ़ा था ..... वजन को देख कर सोचने लगा इसमें तो कोई माल है इसे तो कुटिया में ले जा कर ही खोलुन्गा वो सीधा कुटिया में घुस गया| और उसको खोला तो देखा की लड़का लड़की दोनों अंगूठा पी रहे थे ऋषि ने सोचा ये मेने क्या कर लिया | अगर में इनको वापस छोड़ कर आऊ तो ये मेरा पाप होगा | इसलिए इनको पालने में ही भलाई होगी। अब आगे ... वह ऋषि उन दोनों बच्चो का पालन पोषण करने के लिए एक दूध देने वाली एक बकरी को ले आये क्योकि वे बच्चे बहुत छोटे थे माँ नहीं होने के कारण ऋषि उनके लिए एक बकरी लाये थे | बच्चे दिन दुगने रात चौगुने जवान होते चले गये | उस ऋषि ने सोचा अब ये अपना जीवन खुद जी सकते है इसलिए उनको एक मेले में ले जाकर उनको एक एक आइसक्रीम दिलाकर उनसे कहने लगा में अभी आता हूँ | ये बात कहकर वो उनकर छोड़कर घर आ गया | मेले में दोनों भाई बहन बाबा के आने का इन्तजार करने लगे लेकिन शाम तक बाबा नहीं आये तो दोनो भाई बहिन उसी बाबा की कुटिया में वापिस आ गए। वहा देखा तो बाबा वहां आराम से अपने काम में व्यस्त में थे  दोनो...