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पुरानी हवेली का राज। purani haveli ka raaj Part-1

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पुरानी हवेली का राज। अंजलि के घर के सामने एक बहुत ही पुरानी खंडहर सी पढ़ी हुई हवेली थी। जिस हवेली को देखकर अंजलि को अक्सर डर लगता था। अंजली का घर पहाड़ों पर था। और वह हवेली भी पहाड़ों पर बहुत ही पुराने समय में बनाई हुई थी। अंजलि अक्सर अपने माता पिता से सुनती थी कि वह हवेली एक शापित हवेली है उस हवेली में जाना खतरे से खाली नहीं है अगर उसमें धोखे से भी कोई जानवर चला जाता है तो उसका भी अता पता नहीं चलता। अगर कोई इंसान उस हवेली में चला जाएगा तो उसका क्या हाल होगा वह तो भगवान ही जाने। ऐसी बातें सुनकर अंजलि डर जाया करती थी और सोचती थी कि अगर धोखे से सच में कोई इंसान उस हवेली में चला गया तो उसका भी अता पता नहीं मिलेगा क्योंकि वह एक शापित हवेली है। लेकिन अंजलि सोचती थी कि ऐसा भी तो हो सकता है वह हवेली शापित नहीं हो वहां पर चोर लुटेरे रहते हो। और अपना चोरी का सारा खजाना वही छुपा कर रखते हो और उन्होंने यह अफवाह फैलाई होगी यह हवेली शापित है। और इस हवेली में कोई भी जानवर पक्षी या मानव जाएगा तो जिंदा नहीं आएगा। और हवेली में गए सारे जानवर पक्षियों को भी वही मारते हो। क्योंकि यह कलयुग है यहां पर जो बत...

ज्यादा शर्म करनी भी घातक होती है। Too much shame is also dangerous.

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ज्यादा शर्म करनी भी घातक होती है।  यह कहानी है रामा की। रमा बचपन से ही ऐसे माहौल में पली-बढ़ी हुई थी जिस माहौल में बहुत ही पुराने आचार विचार रखते थे लोग। बहुत ही पुराने रीति और रिवाज अपनाया करते थे।  उसी तरह वहां के माहौल की लड़कियां भी बेहद शर्मीली होती थी। यहां तक कि शादी से पहले एक भी बार वह अपने पति को नहीं  देखती थी शादी के बाद ही अपने पति को देखा करती थी। इस वजह से बहुत सी लड़कियों की जिंदगी शादी के बाद सदा के लिए बर्बाद हो जाती थी और बहुत सी  लड़कियों की जिंदगी खुशियों से भर जाती थी। इसके दो कारण थे पहला कारण तो शर्म था कि वह लाज शर्म के रीति रिवाज के कारण पहले अपने पति को नहीं देख पाती थी जिससे वह अपनी पसंद और नापसंद जाहिर कर सकें।  और दूसरा कारण अगर शादी होने के बाद दूल्हा उन्हें पसंद नहीं आता था तो उनको शादी निभानी ही पड़ती थी उनकी मर्जी हो या नहीं हो। इसीलिए बहुत सी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती और बहुत सी लड़कियों की जिंदगी खुशियों से भर जाती थी। कुछ ऐसा ही हुआ था रमा के साथ। रमा एक पढ़ी-लिखी बहुत ही सुंदर और बहुत ही सुशील लड़की थी। लेकिन वह थोड़...

विमला की अमावस की रात: शैतानी पूजा से शिवजी की दया तक

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विमला की अमावस की रात: शैतानी पूजा से शिवजी की दया तक   अमावस की काली रात जब आती है तो अपने साथ बहुत से ऐसे राज लेकर आती है जिन्हें हम आम इंसान नहीं जान पाते। और अनजाने में अगर  कोई आम इंसान उन राज का शिकार बन जाए तो जिंदगी तबाह हो जाती है।ऐसा ही कुछ हुआ था एक लड़की के साथ। उसका नाम था विमला। विमला गांव और शहर के बीच वाली सीमा में अपनी एक झोपड़ी बनाकर रहा करती थी। वह चाहती तो गांव में या शहर में भी रह सकती थी लेकिन उसने सीमा पर रहना इसीलिए सही समझा क्योंकि वह पूजा-पाठ में बहुत ज्यादा विश्वास करती थी। फिर चाहे वो किसी भी तरह की पूजा पाठ हो  विमला उनमें खूब विश्वास करती थी और अपने फायदे के लिए तरह-तरह  पूजा भी करती थी। और इन सब के बारे में किसी को पता ना चले इसलिए वह ऐसे एकांत में रहना पसंद करती थी। उसके घर के आस-पास में कोई भी घर नहीं था दूर दूर तक सिर्फ  पेड़ और  खेत थे। वह अपनी पूजा को पूरा करने के लिए कभी किसी जानवर की बलि दे देती  तो कभी अपना खून चढ़ाया करती। क्योंकि वह शैतानी पूजा ज्यादा करती थी। वह भगवान को भी मानती थी लेकिन भगवान के सामने उस...

और ज्यादा पाने का लालच पड़ गया भारी। aur jyada paane ka laalach pad gaya bhaari

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  और ज्यादा पाने का लालच पड़  गया भारी। एक गांव में आदित्य नाम का लड़का अपनी एक प्राणी से झोपड़ी में अपनी पत्नी और अपने एक छोटे से बच्चे के साथ रहता था। वह रोज काम करने जाता और रोज पैसे कमा कर अपने घर में  राशन लाकर रख दिया करता था उसका कोई महीने का काम नहीं था रोज मेहनत मजदूरी करता और उसी से अपना पेट भरता। अगर किसी दिन काम नहीं मिलता तो वह उदास हो जाता। और सोचने लगता कि आज अपनी पत्नी और अपने बच्चे  की भूख कैसे शांत करूंगा। आज काम नहीं मिला। तो पैसे भी नहीं है पास में और बिना पैसों के तो इस दुनिया में कुछ नहीं मिलता। फिर वह उदास चेहरा लेकर अपने घर चला जाता लेकिन उसकी पत्नी और बच्चे सब्र रख कर उस रात भूखे सो जाते और अगले दिन फिर से वह काम की तलाश में निकल जाता।  आदित्य के जीवन के दिन उसकी पत्नी और उसके बच्चे के साथ में ऐसे ही बीते थे जा रहे थे। लेकिन फिर भी वह खुश थे कि हम मेहनत इज्जत और इमानदार की खाते हैं भले ही हम गरीब हैं लेकिन किसी का हक मारकर नहीं मारते और मेहनत करके ही खाते हैं। 1 दिन आदित्य काम की तलाश में घर से निकला तो उसे उस दिन कोई काम नहीं मिला ...

आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक। aalsi kisaan ko sikhaya uske bete ne sabak

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आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक।   यह कहानी है रामू की रामू एक गांव में रहता था वह एक किसान था वह एक बहुत ही आलसी किसान था क्योंकि उसके खेत तो बहुत थे।लेकिन वह उनमें कुछ काम नहीं करता था सिर्फ दिन भर सोता रहता था   खेतों में फसल की उगाई और उसकी देखरेख के लिए खेतों में नौकर छोड़ रखे थे और उन नौकरों पर सिर्फ हुकुम चलाता रहता था। कभी खेतों में जाकर भी नहीं देखता था क्योंकि उसे डर था की अगर मैं खेतों में गया तो मुझे काम करना पड़ेगा जिसके कारण मैं सो नहीं पाऊंगा।  रामू की इस आदत का खेतों में लगे नौकर बहुत फायदा उठाते थे। वह अच्छी फसल उगाते तो थे उन्हें बाजार में  बेचकर भी आते थे। और उसके बहुत अच्छे दाम भी मिलते थे लेकिन वह रामू किसान को सिर्फ उसके आधे पैसे ही देते थे। आधे पैसे नौकर आपस में बांट लिया करते थे। और जो पैसे वह रामू किसान को देते थे उसमें से भी अपनी पगार मांग लिया करते थे। और रामू को ना चाहते हुए भी नौकरों को पगार देनी पड़ती थी क्योंकि वह समझता था कि फसल बेचकर यही पैसे आए हैं और इसमें से मुझे इन्हें पगार देनी ही पड़ेगी वरना यह काम नहीं करेंगे।...

गीता की बहादुरी और गीता का आत्मविश्वास - हिंदी कहानी 2021

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गीता एक छोटे से गांव में अपने परिवार के साथ रहती थी | उसके परिवार में उसके माता-पिता और उसका एक बड़ा भाई आनंद था। वह अपने परिवार में बहुत खुशी से रहते थे | गीता अपने बड़े भाई  आनंद से बहुत डरती थी  क्योंकि वह उससे उम्र में बड़ा था  और माता-पिता भी गीता की बातों से ज्यादा आनंद की बातों को ही महत्व देते थे  | इसीलिए गीता को लगता था कि उसकी कोई बात नहीं सुनता और वह अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाती थी  जिस कारण वह अपने आप को बहुत डरा हुआ और अकेला महसूस करती थी। पर वह पढ़ने लिखने वाली लड़की थी तो वह विद्यालय जाती थी |  उसे विद्यालय में कुछ लड़के बहुत दिनों से तंग कर रहे थे लेकिन उसने घर में इसीलिए नहीं बताई की ना जाने माता-पिता क्या सोचते हैं शायद वह यह ना सोचें कि लड़कों से वह भी कोई संबंध रखती है | इसीलिए उसको देखकर और लड़के भी उसे तंग कर रहे थे | अपने भाई से कहना चाहती थी लेकिन डर के कारण वह नहीं कह पाई एक दिन वह अपने विद्यालय जा रही थी तो रास्ते में उसे वही लड़के तंग करने लगे वह वहां से निकल गई आगे चौराहे पर जाकर उससे उसका भाई मिल गया उसे लगा कि वह उसे यू...

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मन में बचपन की बातें

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मन में बचपन की बातें  पार्ट -   1     2        3         4   नमस्कार दोस्तों मेरा नाम मनोज है में राजस्थान के भरतपुर जिले के गाँव फतेहपुर कलां में रहता हूँ सन 1  जनवरी २०१९ ''इस दिन मेरा अपने दोस्तों से नया साल आया है, जो हमारा कुछ नया बनाता है | मेरे जीवन में इस जनवरी से पहले की बाते - बचपन से आज तक हम तीन दोस्त हैं -मनोज (लेखक), अभिषेक और सचिन हम तीनो अपने जीवन में एक ख़ुशी की पतवार (डोर) लिए घूमते हैं | हमारा जीवन एक अतुल्य ख़ुशी भरा जीवन है | इनमे से एक तो बाहर गाँव या पास के गाँव का है उसके गाँव का नाम मूंढौती है जो मेरे गाँव से करीब २.०० किमी की दुरी पर है हम दोनों, में और अभिषेक बचपन से कक्षा १ से ३ तक मूंढौती गाँव में साथ साथ पढ़ते थे में इसे तभी से जानता हूँ उसके बाद में कक्षा 4 से अपने गाँव के सरकारी स्कूल में पढने लगा तो में यहाँ ज्यादा किसी को नहीं जनता था सिर्फ अपने पडौस के बच्चो के अलावा |  फिर कक्षा 5 में अभिषेक भी मेरे गाँव फतेहपुर कलां में पढने लगा तो उस वक्त...

hindi story- Ek Mortgage bhoot ki kahani

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एक बाँधने वाला भूत की कहानी १  नमस्कार दोस्तों आज में एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहा हूँ जो इंसानो से परे भूतों की कहानी है कहानी मजेदार है  पूरी कहानी पढ़ने पर कहानी का मजा आएगा  (आवश्यक सुचना :- इस कहानी में बताई गयी कोई भी जगह या कोई भी मानव का दिया हुआ विवरण वास्तविक नहीं है इसमें सब कुछ काल्पनिक है और ये कहानी सिर्फ मनोरजन के लिए बनाई गई है।) एक गाँव में चार चोर रहते थे चारों चोर चोरी करने में बहुत माहिर थे।  चारों एक साथ रहा करते थे।  जब भी वे चारों चोर किसी भी चीज को चुराने की सोचते तो उनको वह बहुत आसानी से मिल जाती थी। क्योकिं वे बहुत चतुर थे। एक दिन चारों चोर चोरी करने निकल पड़े उनको चोरी करने के लिए एक घर मिल गया चारों उस घर के चारों तरफ देखकर अंदर चले गए उस घर का दरवाजा खुला था चारों को अंदर आने में कोई कठनाई नहीं आयी थी। चारों अब अंदर आने के बाद एक कमरे में घुस गए। कमरे में जाकर देखा तो वहाँ कोई भी नहीं था और ना ही कुछ चुराने लायक था। क्योंकि वह एक खण्डहर था जहाँ सिर्फ मनुष्यों की हड्डियां पड़ी थी। ये देखकर चारों बाहर...

daanveer राजा-शिवी चक्रवर्ती raja ki kahani hindi story in india 2018

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एक दानवीर राजा की कहानी  राजा-शिवी चक्रवर्ती   हाय ! दोस्तों कैसे हो ?  आशा करता हूँ की आप ठीक ही होंगे | दोस्तों आपने राजा - महाराजाओं के किस्से और  कहानी तो बहुत सुने होंगे | राजा महाराजा शाही तलवारों से लड़ते थे और शाही नियम पर ही चलते थे | उन राजाओ में से एक राजा की कहानी बताने जा रहा हूँ | जो बहुत दानी (दान देने वाला) राजा था | वह प्रतिदिन गरीबो के लिए दान किया करता था | राजा की एक रानी थी जिसके एक लड़का था | रानी बहुत बीमार रहती थी | एक दिन वह रानी मर गयी | अब राजा अकेला हो गया था | उसके एक लड़का था | वह लड़का भी अपने पिता की तरह वचनों का पालन करता था | एक बार राजकुमार कुछ बच्चो के साथ खेल रहा था | लेकिन बच्चो के साथ खेलते खेलते वह जंगल की तरफ बढ़ता जा रहा था | सभी बच्चे लुका - छुपी खेल रहे थे जिसमे सभी बच्चे छिप जाते थे और एक बच्चा सभी को ढूंढ़ता था | एक बार सभी बच्चे छिप गए और इधर राजकुमार भी छिप गया | राजकुमार एक झाडी के पीछे छिप गया और जो उसको ढूंढ रहा था | राजकुमार उसको ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा था | लेकिन राजकुमार को वह लड़का नहीं मिल...