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सौतेली मां का छुपा खजाना। souteli maa ka chhupa khajana

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सौतेली मां का छुपा खजाना। यह कहानी है विमला की। विमला पहले से ही शादीशुदा थी पर विधवा की शादी के 2 साल बाद ही उसके पति एक एक्सीडेंट में गुजर गए थे। और वह अकेली रहा करती थी। दूसरी तरफ मोहन। जो विमला का सगा भाई था विमला के लिए हमेशा परेशान रहता था। वह सोचता था। की जिंदगी अकेले तो नहीं गुजारी जा सकती। मुझे अपनी बहन का अकेलापन कैसे भी करके दूर करना ही होगा।  इसीलिए वह विमला से रोज किसी न किसी रिश्ते की बात करता रहता था लेकिन विमला मना कर दिया करती थी। विमला कहती थी कि मेरे पति की जगह कोई नहीं ले सकता वह भले ही मेरी जिंदगी में नहीं रहे लेकिन मेरी यादों में हमेशा रहेंगे। यह सुनकर मोहन अपनी बहन से कहता है देखो बहन जीजा जी को गुजरना था।  वह गुजर गए तुम्हारे सामने तुम्हारी पूरी जिंदगी है और यह जिंदगी ऐसे ही नहीं गुजारी जा सकती तुम तो जानती ही हो अकेली महिला को यह समझ जीने नहीं देता और ऊपर से तुम  विधवा भी हो पता है लोग कैसी कैसी बातें बनाते हैं। इस पर विमला ने कहा मुझे फर्क नहीं पड़ता लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं बस मुझे अकेला रहना है।  मोहन रोज अपनी बहन से एक ही बात कहता ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-5

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अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। He is a stranger but it seems like a relation of our own. भगवान से प्रार्थना करने के बाद रवि वापस रिया के पास चला गया। और दिन रात उसकी सेवा करने में लग गया उसका पूरा ध्यान रखता और रिया के चक्कर में वह अपना ध्यान रखना तो लगभग भूल ही गया था। और भगवान से बस यही प्रार्थना करता हूं कि भगवान मेरी रिया कि याददाश्त वापस दिला दें। और रवि की दुआ भी रंग लाई रिया को जब 2 दिन बाद होश आया तब उसे थोड़ा थोड़ा सब कुछ याद आने लगा था। उसे बस अभी इतना ही याद था कि वह दोनों घर से पहाड़ी पर दर्शन करने के लिए निकले थे और रास्ते में उनका एक कार एक्सीडेंट हो गया और जिसमें वह दोनों बिछड़ गए और रिया एक नदी में जाकर गिर गई और वह बहने लगी डूबने लगी नदी में फिर उसके बाद में जो कुछ भी हुआ वह भी उसे याद था। पर एक्सीडेंट से पहले की कोई भी बात उसे याद नहीं थी। जब रवि को इस बात का पता चला तो रवि को बहुत खुशी हुई कि कम से कम इसे इतना तो याद आया कि मैं इसका पति हूं और हम दोनों एक कार एक्सीडेंट में बिछड़ गए थे अब भगवान ने चाहा तो धीरे-धीरे करके इसे अपने परिवार के बारे में भी सब कुछ याद आ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। ajnabi hai par lagta hai apna sa rista Part-4

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  अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। रवि साधु के पास गया। और कहने लगा रिया को पुरानी बातें याद दिलाना बहुत ही मुश्किल है। पता नहीं मैं यह सब कैसे कर पाऊंगा। कर भी पाऊंगा या नहीं मैं नहीं जानता। यह सुनकर साधु ने कहा। बेटा यह काम बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए मैं यह बात जानता हूं लेकिन नामुमकिन नहीं है। तुम कोशिश करते रहो देखना एक दिन तुम्हारी कोशिश जरूर कामयाब होगी और रिया को सारी पुरानी बातें याद आ जाएगी फिर वह तुम्हें भी पहचानने लगेगी और तुम्हारे साथ तुम्हारे परिवार में लौट जाएगी। ऐसा सुनकर रवि ने कहा बाबा तुम ठीक कहते हो मुझे अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए एक ना एक दिन मेरी कोशिश जरूर रंग लाएगी और रिया को सच में सब कुछ याद आ जाएगा उसकी याददाश्त वापस आ जाएगी और फिर मेरी जिंदगी दोबारा से खुशहाल हो जाएगी। फिर रवि वापस रिया के पास चला गया। और रिया से कहने लगा। कि तुम मुझे यह बताओ तुम्हें खाने में क्या क्या पसंद है तुम्हें कौन सा रंग पसंद है कौन से फूल पसंद है अपनी पसंद ना पसंद मुझे सब कुछ बताओ। तब रिया ने कहा मेरी पसंद ना पसंद मुझे खुद भी याद नहीं है। मुझे लगता है बाबा ने जो कहा था वह सच...

पुरानी हवेली का राज। purani haveli ka raaj Part-1

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पुरानी हवेली का राज। अंजलि के घर के सामने एक बहुत ही पुरानी खंडहर सी पढ़ी हुई हवेली थी। जिस हवेली को देखकर अंजलि को अक्सर डर लगता था। अंजली का घर पहाड़ों पर था। और वह हवेली भी पहाड़ों पर बहुत ही पुराने समय में बनाई हुई थी। अंजलि अक्सर अपने माता पिता से सुनती थी कि वह हवेली एक शापित हवेली है उस हवेली में जाना खतरे से खाली नहीं है अगर उसमें धोखे से भी कोई जानवर चला जाता है तो उसका भी अता पता नहीं चलता। अगर कोई इंसान उस हवेली में चला जाएगा तो उसका क्या हाल होगा वह तो भगवान ही जाने। ऐसी बातें सुनकर अंजलि डर जाया करती थी और सोचती थी कि अगर धोखे से सच में कोई इंसान उस हवेली में चला गया तो उसका भी अता पता नहीं मिलेगा क्योंकि वह एक शापित हवेली है। लेकिन अंजलि सोचती थी कि ऐसा भी तो हो सकता है वह हवेली शापित नहीं हो वहां पर चोर लुटेरे रहते हो। और अपना चोरी का सारा खजाना वही छुपा कर रखते हो और उन्होंने यह अफवाह फैलाई होगी यह हवेली शापित है। और इस हवेली में कोई भी जानवर पक्षी या मानव जाएगा तो जिंदा नहीं आएगा। और हवेली में गए सारे जानवर पक्षियों को भी वही मारते हो। क्योंकि यह कलयुग है यहां पर जो बत...

Ajnavi hai par lagta hai apna sa rista Part-2

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अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता।  Part-2 अगर आपने इस कहानी का पार्ट 1 नहीं पढ़ा हो तो आप नीचे क्लिक करके उस पार्ट-1  को भी पढ़ लो  अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता।-पार्ट-1 साधु की कुटिया से रिया मेले में पहुंचती है और उधर से रवि अपने घर से मेले में पहुंचता है। और साथ में रवि के दिल में यह उम्मीद भी होती है कि शायद आज इस मेले में मुझे मेरी खोई हुई रिया मिल जाए। रवि धीरे-धीरे करके मेले में अपनी रिया को ढूंढने लगता है। वह धीरे धीरे कर के मेले में आगे बढ़ता चला जाता है।  मेला काफी बड़ी जगह में लगा हुआ था। इसलिए रवि को बहुत ही परेशानी हो रही थी इतने बड़े मेले में रिया को ढूंढने में। रवि को पता नहीं था कि रिया उसे मेले में मिलेगी भी या नहीं। बस वह अपने दिल की बात मानकर रिया को मेले में ढूंढे जा रहा था। क्योंकि उसका दिल बार-बार कह रहा था कि आज इस मेले में उसकी रिया उसे मिलने वाली है। इधर रिया सारी बातों से अनजान और बेफिक्र होकर मेले में घूम रही थी और आनंद ले रही थी। तभी रास्ते में रिया को एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर दिखाई दिया। उस मंदिर को देखते ही रिया को साधु की कही ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता ajnavi hai par lagta hai apna sa rista Part-1

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 अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-1 यह कहानी है रिया और रवि की। रिया और रवि पहले से ही शादीशुदा थे। उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत अच्छे से गुजर रही थी। 1 दिन रिया और रवि दोनों शादी के बाद दर्शन करने किसी पहाड़ी पर बने मंदिर के दर्शन करने के लिए अपनी कार से जा ही रहे थे कि रास्ते में किसी दूसरी कार की टक्कर लगने की वजह से उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। जिससे उनकी कार का बैलेंस बिगड़ गया। और उस कार एक्सीडेंट में रिया कार से निकलकर बहती नदी में जा गिरी। जो  नदी पहाड़ी पर जाने वाले रोड के बराबर में बह रही थी। रिया नदी में बह जाने के कारण बहुत दूर जा चुकी थी। और नदी के किनारे बसी एक दूसरी बस्ती की तरफ को जाकर रुक  गई थी। जिसकी वजह से वह रवि से बिछड़ गई थी। रवि ने रिया को ढूंढने की बहुत कोशिश की पर रिया उसे नहीं मिल पाई। रवि को रिया की चिंता होने लगी और वह पुलिस स्टेशन चला गया और रिया के  गुमशुदा होने की रिपोर्ट लिखा दी। और अपने परिवार के पास चला गया। और परिवार वालों को सारी बात बता दी। और साथ में यह भी बता दिया कि उसने पुलिस में रिपोर्ट भी लिखवा दी है रिया के गुमशुदा ह...

अपने तो अपने ही होते हैं। apne to apne hi hote hain

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  अपने तो अपने ही होते हैं। रवि और कुलदीप छोटे बड़े भाई थे जिसमें रवि बड़ा भाई था और कुलदीप छोटा भाई था। दोनों की शादी हो गई थी तो इसीलिए दोनों अपनी-अपनी पत्नियों के साथ खुशी खुशी एक ही घर में रहा करते थे। शादी के बाद दोनों की पत्नियां कुछ साल तक तो ठीक तरह आपस में मिलजुल कर रहती थी।  लेकिन फिर पड़ोसियों के बहकावे में आकर एक दूसरे से लड़ने झगड़ने लगी। दोनों भाई रवि और कुलदीप बहुत परेशान थे और दोनों बस दिन-रात यही सोचते रहते कि अपनी-अपनी पत्नियों में सुला कैसे करवाएं कैसे उन दोनों को पहले की तरह साथ-साथ कैसे रखें।  जैसे तैसे अपनी मां को राजी करके और अपनी हिम्मत को इकट्ठा करके उन दोनों में सुलह कराने के लिए बैठते बहुत। थे। वैसे ही दोनों देवरानी जेठानी एक दूसरे में कमी निकालना एक दूसरे की चुगली करना एक दूसरे से लड़ाई झगड़ा करने बैठ जाती थी। इससे रवि और कुलदीप बेहद परेशान हो गए थे कि इस तरह तो हम दोनों इन दोनों की कभी सुला ही नहीं करा पाएंगे। और हमारे घर का क्लेश कभी खत्म ही नहीं होगा बल्कि और बढ़ता ही चला जाएगा। रवि बड़ा भाई था और कुलदीप छोटा भाई था। इसीलिए रवि की पत्नी कुलद...

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। koshis karne walon ki kabhi haar nahin hoti

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 कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह कहानी है राजेश की राजेश एक गांव का पढ़ा-लिखा और सुंदर लड़का था। और उसका बचपन से ही सपना था कि वह शहर में जाकर अपना एक बिजनेस करें। जिससे वह अपने परिवार को सारे सुख दे सकें। और इसीलिए वह बचपन से ही बहुत मन से पढ़ाई करता रहा। और पढ़ाई के साथ-साथ इंग्लिश भी सीखता रहा क्योंकि वह जानता था कि अगर शहरों में बिजनेस करना है तो इंग्लिश भाषा आनी बहुत ही जरूरी है।  इसलिए वह इंग्लिश भी अच्छे से जानता था। अब धीरे-धीरे करके समय बीतता गया उसकी पढ़ाई पूरी हो गई। तब उसने सोचा मेरी पढ़ाई पूरी हो गई है तो क्यों ना मैं शहर जाकर अब बिजनेस करने की कोशिश करूं। लेकिन उसके लिए मुझे कुछ दिन किसी बिजनेसमैन के साथ नौकरी करनी पड़ेगी ताकि मैं समझ सकूं कि बिजनेस कैसे होता है। उसके लिए मुझे किसी बिजनेसमैन के वहां मैनेजर की नौकरी  करनी होगी।  क्योंकि दूसरे के बताने और खुद के सीखने से जमीन आसमान का फर्क होता है खुद के सीखने से तजुर्बा बहुत अच्छा हो जाता है और किसी भी काम को करने के लिए तजुर्बे की बहुत जरूरत होती है।  ऐसा सोचकर वह गांव से शहर के लिए निकल ...