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सौतेली मां का छुपा खजाना। souteli maa ka chhupa khajana

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सौतेली मां का छुपा खजाना। यह कहानी है विमला की। विमला पहले से ही शादीशुदा थी पर विधवा की शादी के 2 साल बाद ही उसके पति एक एक्सीडेंट में गुजर गए थे। और वह अकेली रहा करती थी। दूसरी तरफ मोहन। जो विमला का सगा भाई था विमला के लिए हमेशा परेशान रहता था। वह सोचता था। की जिंदगी अकेले तो नहीं गुजारी जा सकती। मुझे अपनी बहन का अकेलापन कैसे भी करके दूर करना ही होगा।  इसीलिए वह विमला से रोज किसी न किसी रिश्ते की बात करता रहता था लेकिन विमला मना कर दिया करती थी। विमला कहती थी कि मेरे पति की जगह कोई नहीं ले सकता वह भले ही मेरी जिंदगी में नहीं रहे लेकिन मेरी यादों में हमेशा रहेंगे। यह सुनकर मोहन अपनी बहन से कहता है देखो बहन जीजा जी को गुजरना था।  वह गुजर गए तुम्हारे सामने तुम्हारी पूरी जिंदगी है और यह जिंदगी ऐसे ही नहीं गुजारी जा सकती तुम तो जानती ही हो अकेली महिला को यह समझ जीने नहीं देता और ऊपर से तुम  विधवा भी हो पता है लोग कैसी कैसी बातें बनाते हैं। इस पर विमला ने कहा मुझे फर्क नहीं पड़ता लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं बस मुझे अकेला रहना है।  मोहन रोज अपनी बहन से एक ही बात कहता ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-3 Ajnavi hai par lagata hai apna saa rista

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 अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-3  अगर आपने इस कहानी का पार्ट 2 नहीं पढ़ा है तो कृपया करके पहले part 2  पढ़ ले तभी कहानी समझ में आयेगी    अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता Part 2    अब कहानी आगे.. जैसे ही साधु मंदिर के अंदर चले गए वैसे ही उन्हें रवि एक कोने में बैठा हुआ दिखाई दिया। और उसके हाथ में रिया की तस्वीर थी और उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। और वह धीमी आवाज में अपने आपसे कह रहा था कि मैंने ऐसी कौन से गुनाह किए थे जिसकी सजा भगवान मुझे इस तरह से दे रहा है जिस पत्नी को मैंने अपनी जान से ज्यादा माना अपने से ज्यादा उसकी परवाह कि आज वही कहती है कि मैं तुम्हें नहीं जानती तुम मेरे पति नहीं हो ऐसा कैसा हो सकता है भगवान मेरे साथ तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। तभी साधु ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा। और कहने लगे बेटा चिंता मत कर तेरी परेशानी अब जल्दी ही भगवान शिव दूर कर देंगे। क्योंकि तू जिसकी तलाश में यहां तक आ पहुंचा है जिसकी तस्वीर को निहार कर तू इस तरह रो रहा है वह मेरे पास है और सुरक्षित भी है बस फर्क इतना है कि वह तुझे पहचानने से इंकार कर रही है ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। ajnabi hai par lagta hai apna sa rista Part-4

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  अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। रवि साधु के पास गया। और कहने लगा रिया को पुरानी बातें याद दिलाना बहुत ही मुश्किल है। पता नहीं मैं यह सब कैसे कर पाऊंगा। कर भी पाऊंगा या नहीं मैं नहीं जानता। यह सुनकर साधु ने कहा। बेटा यह काम बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए मैं यह बात जानता हूं लेकिन नामुमकिन नहीं है। तुम कोशिश करते रहो देखना एक दिन तुम्हारी कोशिश जरूर कामयाब होगी और रिया को सारी पुरानी बातें याद आ जाएगी फिर वह तुम्हें भी पहचानने लगेगी और तुम्हारे साथ तुम्हारे परिवार में लौट जाएगी। ऐसा सुनकर रवि ने कहा बाबा तुम ठीक कहते हो मुझे अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए एक ना एक दिन मेरी कोशिश जरूर रंग लाएगी और रिया को सच में सब कुछ याद आ जाएगा उसकी याददाश्त वापस आ जाएगी और फिर मेरी जिंदगी दोबारा से खुशहाल हो जाएगी। फिर रवि वापस रिया के पास चला गया। और रिया से कहने लगा। कि तुम मुझे यह बताओ तुम्हें खाने में क्या क्या पसंद है तुम्हें कौन सा रंग पसंद है कौन से फूल पसंद है अपनी पसंद ना पसंद मुझे सब कुछ बताओ। तब रिया ने कहा मेरी पसंद ना पसंद मुझे खुद भी याद नहीं है। मुझे लगता है बाबा ने जो कहा था वह सच...

अपने तो अपने ही होते हैं। apne to apne hi hote hain

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  अपने तो अपने ही होते हैं। रवि और कुलदीप छोटे बड़े भाई थे जिसमें रवि बड़ा भाई था और कुलदीप छोटा भाई था। दोनों की शादी हो गई थी तो इसीलिए दोनों अपनी-अपनी पत्नियों के साथ खुशी खुशी एक ही घर में रहा करते थे। शादी के बाद दोनों की पत्नियां कुछ साल तक तो ठीक तरह आपस में मिलजुल कर रहती थी।  लेकिन फिर पड़ोसियों के बहकावे में आकर एक दूसरे से लड़ने झगड़ने लगी। दोनों भाई रवि और कुलदीप बहुत परेशान थे और दोनों बस दिन-रात यही सोचते रहते कि अपनी-अपनी पत्नियों में सुला कैसे करवाएं कैसे उन दोनों को पहले की तरह साथ-साथ कैसे रखें।  जैसे तैसे अपनी मां को राजी करके और अपनी हिम्मत को इकट्ठा करके उन दोनों में सुलह कराने के लिए बैठते बहुत। थे। वैसे ही दोनों देवरानी जेठानी एक दूसरे में कमी निकालना एक दूसरे की चुगली करना एक दूसरे से लड़ाई झगड़ा करने बैठ जाती थी। इससे रवि और कुलदीप बेहद परेशान हो गए थे कि इस तरह तो हम दोनों इन दोनों की कभी सुला ही नहीं करा पाएंगे। और हमारे घर का क्लेश कभी खत्म ही नहीं होगा बल्कि और बढ़ता ही चला जाएगा। रवि बड़ा भाई था और कुलदीप छोटा भाई था। इसीलिए रवि की पत्नी कुलद...