Ajnavi hai par lagta hai apna sa rista Part-2
अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-2 अगर आपने इस कहानी का पार्ट 1 नहीं पढ़ा हो तो आप नीचे क्लिक करके उस पार्ट-1 को भी पढ़ लो अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता।-पार्ट-1 साधु की कुटिया से रिया मेले में पहुंचती है और उधर से रवि अपने घर से मेले में पहुंचता है। और साथ में रवि के दिल में यह उम्मीद भी होती है कि शायद आज इस मेले में मुझे मेरी खोई हुई रिया मिल जाए। रवि धीरे-धीरे करके मेले में अपनी रिया को ढूंढने लगता है। वह धीरे धीरे कर के मेले में आगे बढ़ता चला जाता है। मेला काफी बड़ी जगह में लगा हुआ था। इसलिए रवि को बहुत ही परेशानी हो रही थी इतने बड़े मेले में रिया को ढूंढने में। रवि को पता नहीं था कि रिया उसे मेले में मिलेगी भी या नहीं। बस वह अपने दिल की बात मानकर रिया को मेले में ढूंढे जा रहा था। क्योंकि उसका दिल बार-बार कह रहा था कि आज इस मेले में उसकी रिया उसे मिलने वाली है। इधर रिया सारी बातों से अनजान और बेफिक्र होकर मेले में घूम रही थी और आनंद ले रही थी। तभी रास्ते में रिया को एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर दिखाई दिया। उस मंदिर को देखते ही रिया को साधु की कही ...