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पुरानी हवेली का राज। लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पुरानी हवेली का राज – भाग 2

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 इस कहानी का भाग 1  पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें टीना और अंजलि दोनों हवेली जाने के लिए तैयार हो चुकी थीं। उनके पास एक टॉर्च, कुछ खाने-पीने की चीजें और एक छोटी सी रस्सी थी, ताकि अगर अंदर कोई खतरा हो, तो वे किसी तरह बाहर निकल सकें। दोनों का दिल तेजी से धड़क रहा था, लेकिन रोमांच और जिज्ञासा के कारण वे एक-दूसरे को हिम्मत दे रही थीं। रहस्यमयी हवेली का दरवाज़ा जब वे हवेली के करीब पहुंचीं, तो देखा कि उसका मुख्य दरवाजा जंग लगा होने के बावजूद थोड़ा-सा खुला था, मानो किसी ने हाल ही में उसे हिलाया हो। हवेली के आसपास की हवा ठंडी थी, जबकि बाकी जगह सामान्य गर्मी थी। अंजलि ने धीरे से टीना की ओर देखा और फुसफुसाई, "तुझे भी कुछ अजीब नहीं लग रहा?" टीना ने सिर हिलाया, लेकिन उसने खुद को संभाला और कहा, "अब हम यहां तक आ ही गई हैं, तो अंदर चलकर देखते हैं।" दोनों ने धीरे-धीरे अंदर कदम रखा। हवेली के अंदर घुप्प अंधेरा था। टॉर्च की रोशनी में उन्हें टूटी-फूटी दीवारें, जाले और पुराने फर्नीचर दिख रहे थे। एक ओर सीढ़ियां ऊपर जा रही थीं, और दूसरी ओर एक बड़ा सा हॉल था, जहां दीवारों पर कुछ पुरानी,...

रहस्यमयी हवेली का राज: करण की डायरी से जुड़ा रहस्य

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 इस कहानी का पिछला भाग के लिए यहां क्लिक करें करण ने मोहन से पूछा कि क्या तुम किसी पुरानी हवेली के बारे में जानते हो? पर मोहन ने कोई भी जवाब नहीं दिया। करण ने फिर पूछा मैं कुछ पूछ रहा हूं क्या तुम किसी हवेली के बारे में जानते हो? मोहन ने फिर सोचा कि अगर मैं इसकी बात का जवाब दे दिया तो मैं यह नहीं पूछ पाऊंगा इससे की उसे इस हवेली के बारे में पता कैसे चला क्योंकि वह एक ऐसा राज है जो सिर्फ मुझे पता है और अब यह राज इसे कैसे पता चला। करण के बार-बार एक ही सवाल पूछने पर मोहन ने करण से बस इतना ही कहा कि पहले यह बताओ जिस हवेली के बारे में तुम बात कर रहे हो उसके बारे में तुम्हें पता कैसे चला क्योंकि उसे हवेली के बारे में तो सिर्फ मैं जानता हूं या तुम्हारे परिवार वाले जानते हैं और तुम्हारे परिवार वालों ने तुम्हें आज तक उस हवेली के बारे में बताया नहीं तो तुम्हें पता कैसे चला।  यह सुनकर करण हकलाने लगा और बोला तो तूझे इससे क्या मतलब मुझे कहीं से भी पता चला हो। मोहन बोला अगर मुझे तुम्हारी बात से कोई मतलब ही नहीं है तो तुम मुझसे सवाल पूछ भी क्यों रहे हो अब कारण ने सोचा अगर मुझे इस हवेली के बा...

पुरानी हवेली का राज। purani haveli ka raaj Part-1

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पुरानी हवेली का राज। अंजलि के घर के सामने एक बहुत ही पुरानी खंडहर सी पढ़ी हुई हवेली थी। जिस हवेली को देखकर अंजलि को अक्सर डर लगता था। अंजली का घर पहाड़ों पर था। और वह हवेली भी पहाड़ों पर बहुत ही पुराने समय में बनाई हुई थी। अंजलि अक्सर अपने माता पिता से सुनती थी कि वह हवेली एक शापित हवेली है उस हवेली में जाना खतरे से खाली नहीं है अगर उसमें धोखे से भी कोई जानवर चला जाता है तो उसका भी अता पता नहीं चलता। अगर कोई इंसान उस हवेली में चला जाएगा तो उसका क्या हाल होगा वह तो भगवान ही जाने। ऐसी बातें सुनकर अंजलि डर जाया करती थी और सोचती थी कि अगर धोखे से सच में कोई इंसान उस हवेली में चला गया तो उसका भी अता पता नहीं मिलेगा क्योंकि वह एक शापित हवेली है। लेकिन अंजलि सोचती थी कि ऐसा भी तो हो सकता है वह हवेली शापित नहीं हो वहां पर चोर लुटेरे रहते हो। और अपना चोरी का सारा खजाना वही छुपा कर रखते हो और उन्होंने यह अफवाह फैलाई होगी यह हवेली शापित है। और इस हवेली में कोई भी जानवर पक्षी या मानव जाएगा तो जिंदा नहीं आएगा। और हवेली में गए सारे जानवर पक्षियों को भी वही मारते हो। क्योंकि यह कलयुग है यहां पर जो बत...