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jaisa ko taisa- kahani hindi story in india

जैसा को तैसा -एक गरीब की कहानी एक बार एक गरीब व्यक्ति था उसके पास एक भैंस थी, वह अपने परिवार का पालन- पोषण उसी भैंस के दूध घी बेचकर करता था वह बहुत ईमानदार था क्योकि वह किसी से भीख नहीं लेना चाहता था वह अपनी गरीबी को मंजूर करके पूरी मेहनत से ईमानदारी करता था वह अपनी भैंस का घी एक सेठ को बेचता था एक दिन वह गरीब व्यक्ति किसी कारण से कहीं बाहर चला गया था, फिर उसकी पत्नी ने घी की लोनी (लूणी घी)  बना कर किसी दूसरे व्यक्ति के हाथों भेज दिए थे उस व्यक्ति ने सेठ को लूणी घी  की पिंडी भेज दी सेठ ने सोचा की देखु तो सही की सारी  घी की लोनी(लूणी घी)  1 kg की ही है या नहीं | उसने घी की सभी लोनियों(लूणी घी)  को एक एक करके तोला तो हर लोनी (लूणी घी)  900 ग्राम की ही थी सेठ को बहुत गुस्सा आया वह उस व्यक्ति के घर गया और बोला आप मुझे कम घी देते है तो उस गरीब व्यक्ति ने कहा की मेरे पास तोलने के लिए कुछ नहीं है इसलिए में आपकी चीनी से ही देता हूँ तो सेठ समझ गया की में चीनी भी तो काम देता हूँ | जैसा को तैसा - एक गरीब की कहानी आप ये कहानी डेली स्टोरी मेक...

भारतीय नारियों के लिए आदर्श - राष्ट्रमाता कस्तूरबा | हिंदी में | पूरी जानकारी |

भारतीय नारियों के लिए आदर्श - राष्ट्रमाता कस्तूरबा  | हिंदी में | पूरी जानकारी |  राष्ट्रमाता कस्तूरबा  गाँधी जी का कहना था की मेरी पत्नी के प्रति अपनी भावना का वर्णन यदि मैं कर सकूँ तो ही हिंदू धर्म के प्रति मेरी क्या भावना है , उसे प्रकट कर सकता हूँ | मेरी पत्नी मेरे अंतर को जिस प्रकार हिलती है , उस प्रकार दुनिया की कोई दूसरी स्त्री उसे हिला नहीं सकती | उसके लिए ममता के एक अटूट बंधन की भावना मेरे अंतर में जाग्रत रहती है |  युगपुरुष गाँधी को इतना प्रभावित करके नारी जाती का महत्व बढ़ाना कोई साधारण बात नहीं है | बा के इस गुण और महानता की प्रशंसा बड़े - बड़े विद्वानों और विचारकों ने की है | श्रीमती गोशी बहन कैथरिन ने बा के निकट रहकर और उनकी अंतरंग भावनाओं का अध्ययन करके यह लिखा था - "बा और सरोजिनी  देवी को देख कर ही हमें इस बात का अंदाजा ही सकता है की नारीत्व में कितना गौरत्व निहित होता है | इन दो स्त्रियों को देखने से क्या हमें इस बात का दिव्य दर्शन नहीं होता की हमारी भारतभूमि महान नारियों की भूमि है |  "        स्व...

महापुरुषों की दृष्टि में गौ की उपयोगिता और हमारा कर्तव्य

हमारी सभी कहानी यहाँ से पढ़ सकते हैं यहाँ  क्लिक करे  गौ केवल एक जाति (हिन्दू) विशेष की पूजनीय पशु मात्र नहीं , बल्कि इसके द्वारा दिए जाने वाले अनुदान - दूध , दही , घी , गौ मूत्र , गोबर (पंचगव्य) संपूर्ण मानव जाति के लिए वरदान है | उसका महत्त्व धार्मिक आर्थिक एवं अध्यात्मिक दृष्टि से विश्व  प्रसिद्ध है और सर्वजन हिताय है |  गौ की महत्ता केवल हिन्दू धर्म में ही हो ऐसी बात नहीं है , संसार के सभी धर्मों के जो सत्यान्वेषी पुरुष हैं इस विषय में एक मत हैं | अब पृथक पृथक धर्म के व्यक्तियों की गाय की महत्ता के सम्बन्ध में विचारधारा दी जा रही है | छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 1 छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 2 छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 3 बैन बादशाह शहजादी की कहानी पार्ट - 1  बैन बादशाह शहजादी की कहानी पार्ट - 2 अपने भाग्य का फल  राजा बासिक और राजा परिक की कहानी  अहिल्या का छल की कहानी  ईश्वर की परीक्षा का कडवा सत्य  रावण के जम्म की कहानी  पुरानी हवेली की गुफा का रहस्य  राजा रग की कहानी और राजा दशरथ का जन्म   पार्ट ...

सत पुरुषों की सादगी एवं निर्भीकता - full information

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सत पुरुषों की सादगी एवं निर्भीकता - full information  सादगी महापुरुषों का आभूषण है | इस भारत भूमि ने अनेकों ऐसे महामानव दिए हैं जिन्होंने लोभ व शानों - शौकत का जीवन न जीते हुए सदैव सादगी व संयमपूर्ण जीवन जीकर अपने को अमर किया है | ऐसे महामानवों से भारत का इतिहास भरा पड़ा है - पढ़िए ऐसी ही एक जीवन गाथा - महान वैज्ञानिक प्रफुल्ल चंद्र राय inke baare me poori jankari              सादगी -                                         महाराष्ट्र के पेशवा माधवराव के गुरु , मंत्री एवं प्रधान न्यायाधीश जैसे उच्च पद पर श्रीराम शास्त्री नामक एक कुलीन ब्राहमण थे | विव्दता एवं उच्च पदों से सम्पन्न होकर भी शास्त्री जी का जीवन सादगी का मूर्त रूप था | एक दिन शास्त्री जी की धर्म पत्नी आवश्यक कार्यवश राजमहल में रानी के पास गयी रानी ने गुरुपत्नी को जनसाधारण से भी सामान्य वस्त्रो में देखा तो बड़ा आश्चर्य हुआ | उन्हें गुरुपत्नी की यह स्थिति अपने और स्वयं ...

महान वैज्ञानिक प्रफुल्ल चंद्र राय inke baare me poori jankari

  महान वैज्ञानिक प्रफुल्ल चंद्र राय  भारत केवल धर्म गुरुओं की ही जन्म भूमि नहीं है बल्कि भारत भूमि ने , यहाँ की संस्कृति ने अनेक वैज्ञानिक , अर्थशास्त्र , मानवतावादी सिद्धांतो के सूत्र धार - महामानवों , देव पुरुषों को भी जन्म दिया है | हमारे वेद ज्ञान - विज्ञान के अतुलनीय भण्डार है | इसने अनेक शिक्षाविद , ज्योतिष्कार व खगोल शास्त्री भी दिए है |  प्रफुल्ल चंद्र राय जीवनी   इंग्लैण्ड से रसायन विज्ञान की उच्च परीक्षा पास कर लेने के पश्चात जब प्रफुलचन्द्र राय भारत आये तो उन्हें कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर का पद मिला | उनका वेतन 250 रु मासिक था जबकि अंग्रेज शिक्षक को 1000 से भी अधिक वेतन दिया जाता था | इस अन्याय के प्रतिकार स्वरूप श्री राय ने शिक्षा विभाग के अध्यक्ष क्राप्ट साहब से शिकायत की | उत्तर मिला , आपको कोई बाध्य नहीं करता की आप इस नौकरी को स्वीकार करें | यदि आप अपनी योग्यता को इतना अधिक समझते हैं तो कहीं भी वैसा कार्य करके दिखा सकते हैं | यह भारतीयों का अपमान था | प्रफुल्ल बाबू ने उसी दिन ठान लिया की अपनी योग्यता के बल पर ...

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर- full jankari

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर  हमारी सभी कहानी यहाँ से पढ़ सकते हैं पढ़ने के लिए  यहाँ  क्लिक करे  नमस्कार दोस्तों हम आज बताने जा रहे है उस महान व्यक्ति के बारे में जिनका नाम श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर है | नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर बंगाल के प्रसिद्ध कवि , उपन्यासकार , नाटककार , स्वांगकार और दार्शनिक श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था | श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर को बचपन में प्यार से रवि के नाम से पुकारे थे | इन्होने आठ वर्ष की उम्र में ही अपनी प्रथम कविता और सोलह वर्ष में कहानी व नाटक लेखन का कार्य आरम्भ कर दिया |                  ' गीतांजलि ' में वैष्णव कवियों की प्रेम -भावना का अनुपम परिचय दिया गया है | साथ ही उसमे उपनिषदों के सर्वोच्च आध्यात्मिक विचारों का भी बड़ी मार्मिकता से समावेश है | कवि का यह अनूठा ग्रन्थ आध्यात्मिक गगन पर ज्ञान -सूर्य बनकर उदित हुआ है , जिसकी निर्मल ज्योति का प्रकाश समस्त विश्व का हृदय आलोकित कर रहा...

हम सुसंस्कृत बने, संस्कारवान बने

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हम सुसंस्कृत बने, संस्कारवान बने     हमारी सभी कहानी यहाँ से पढ़ सकते हैं पढ़ने के लिए  यहाँ  क्लिक करे  शिस्टाचार मनुष्य का आभूषण है - संस्कारो से वित्त शुध्दि होती है | संस्कृति हमारे अंतस्थ दुष्चिंतन का मार्जन करने की शक्ति का नाम है और संस्कार उसका माध्यम है|  संस्कारों का सर्वाधिक महत्व चित्त -शुद्धि में है | मन की मलीनता ही सबसे अधिक दुखदायी है | काया की मलीनता तो साबुन - पानी से धोयी भी जा सकती है , पर मन तो न जाने कहाँ कहाँ भटकता रहता है और प्रतिपल अशुभ चिंतन के द्वारा प्रदूषित होता रहता है | इन्द्रियों का प्रेरक भी वही है, इसलिए उसी की शुद्धि का निरंतर ध्यान एवं प्रयत्न करना चाहिए | योग सूत्र में चित्तवृत्ति निरोध को योग कहा गया है , जबकि निरोध करना सहज कार्य नहीं है | अतः सर्वप्रथम चित्त को अशुभ से हटाकर सुभप्रवृत्तियो में लगाना चाहिए , क्योंकि चित्त को कुछ न कुछ अवलंबन तो अपेक्षित ही है | यदि उच्चादर्श एवं ध्येय में हम लगे रहेंगे तो बुरी आदतों की ओर हमारा ध्यान नहीं जाएगा | यदि कभी गया भी तो बुरा करने के लिए समय ही न मिलेगा |...