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अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-3 Ajnavi hai par lagata hai apna saa rista

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 अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-3  अगर आपने इस कहानी का पार्ट 2 नहीं पढ़ा है तो कृपया करके पहले part 2  पढ़ ले तभी कहानी समझ में आयेगी    अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता Part 2    अब कहानी आगे.. जैसे ही साधु मंदिर के अंदर चले गए वैसे ही उन्हें रवि एक कोने में बैठा हुआ दिखाई दिया। और उसके हाथ में रिया की तस्वीर थी और उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। और वह धीमी आवाज में अपने आपसे कह रहा था कि मैंने ऐसी कौन से गुनाह किए थे जिसकी सजा भगवान मुझे इस तरह से दे रहा है जिस पत्नी को मैंने अपनी जान से ज्यादा माना अपने से ज्यादा उसकी परवाह कि आज वही कहती है कि मैं तुम्हें नहीं जानती तुम मेरे पति नहीं हो ऐसा कैसा हो सकता है भगवान मेरे साथ तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। तभी साधु ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा। और कहने लगे बेटा चिंता मत कर तेरी परेशानी अब जल्दी ही भगवान शिव दूर कर देंगे। क्योंकि तू जिसकी तलाश में यहां तक आ पहुंचा है जिसकी तस्वीर को निहार कर तू इस तरह रो रहा है वह मेरे पास है और सुरक्षित भी है बस फर्क इतना है कि वह तुझे पहचानने से इंकार कर रही है ...

माता पिता के मरने के बाद दी उन्हें इज्जत। mata pita ke marne ke baad di unhe ijjat

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माता पिता के मरने के बाद दी उन्हें इज्जत।  यह कहानी है एक ऐसे लड़के दीपक की जो अपने मां-बाप की दिन और रात की मेहनत के बाद एक बहुत ही बड़ा अमीर बिजनेसमैन बन गया था लेकिन वह अपने मां बाप को भूल गया था कि वह भी इंसान है। वह अपने काम में इतना व्यस्त रहता कि उसे मां-बाप की याद भी नहीं आती थी और अगर दीपक अपने मां-बाप से मिलता था तो उनके पास बैठता भी नहीं था दूर से ही बात करता था गैरों की तरह हालचाल पूछता और चला जाता था। उसके इस व्यवहार से उसके माता-पिता हमेशा दुखी रहते थे तीज त्यौहार पर भी उसका यही व्यवहार रहता था  जिसकी वजह से उसके माता-पिता अपने आंसू नहीं रोक पाते थे। हमेशा भगवान से उन्हें यही शिकायत रहती थी कि भगवान तूने हमें बेटा दिया तो ऐसा क्यों दिया या तो तू बेटा ही नहीं देता और या उसमें गुण अच्छे देता। पर धीरे-धीरे करके उन्होंने भगवान को भी ऐसा कहना बंद कर दिया था क्योंकि वह समझ गए थे कि यह सब उनकी दिन और रात की कड़ी मेहनत का कड़वा फल है। यह सच बहुत ही कड़वा था लेकिन था  तो सच। कि कोई बेटा अपने मां-बाप को इस तरह से कैसे भूल सकता है। क्या दौलत ही सब कुछ होती है आज दीपक...

सौतेले पिता ने दिया अपने दो बेटों को अनोखा धन। soutele pita ne diya apne do beton ko anokha dhan

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यह कहानी है  मोहन की। मोहन एक गरीब  किसान था। उसके परिवार में वह सिर्फ अकेला था और कोई भी नहीं था। क्योंकि 2 साल पहले एक हादसे में उसने अपनी  पत्नी और अपने एक बेटे को खो दिया था। दरअसल 2 साल पहले गांव में एक  बाढ़ आई थी और मोहन गांव से बाहर शहर में अपने मामा जी से मिलने उनके घर गया हुआ था पर गांव में अचानक बाढ़ आने से  गांव के लगभग सारे घर तेज बहाव के कारण बह गए थे और कुछ लोग उस गंदे पानी में फस कर मर भी गए थे जिसमें  मोहन की पत्नी और उसका एक बेटा भी शामिल था उसकी पत्नी तो बाढ़ में बह गई थी पर बेटा गंदे पानी में फस कर मर गया था। मोहन को जैसे ही यह शोक समाचार मिला वह जैसा बैठा था वैसे ही दौड़ा-दौड़ा गांव में आया और जब उसने अपना घर देखा तो वहां उसे घर के सिर्फ निशान ही मिल पाए थे। घर कच्चा होने के कारण पानी के तेज बहाव से बह गया था उसकी पत्नी लापता हो गई थी और  बेटे का भी अंतिम संस्कार गांव वालों ने कर दिया था तो अब मोहन करता भी तो क्या सिर्फ रोने के सिवा और कुछ नहीं कर सकता था वह बिलक बिलक कर रोने लगा और खुद भी मरने के लिए सोचने लगा ऐसा सोचते सोचते वह ए...

एक कुम्हार अपने देश की मिट्टी से गरीब से अमीर बन गया। ek kumhar apne desh ki mitti se gareeb se ameer ban gaya -hindi kahani 2021

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एक कुम्हार अपने देश की मिट्टी से  गरीब से अमीर बन गया। यह कहानी है एक ऐसे किसानों की जो बहुत ही गरीब था लेकिन अपने देश की मिट्टी से वह अमीर बन गया। दरअसल यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जो कुम्हार ही नहीं था लेकिन अपने काम के कारण वह कुम्हार कहलाया। यह कहानी है मोहन की मोहन अपने एक शहर में रहता था शहर में उसके माता पिता  थे। शहर में उनकी एक अच्छी खासी कपड़ों की दुकान थी जिससे वह अच्छे पैसे कमा लिया करते थे और अपना घर खुशी-खुशी चलाते थे। मोहन बहुत ही मेहनती लड़का था वह अपनी दुकान में बहुत ही लगन और ईमानदारी से काम करता था जिसके कारण वह अधिक धन कमा पाता था लेकिन 1 दिन उसकी दुकान में अचानक आग लग गई जिसके कारण उसकी दुकान का आधे से ज्यादा सामान जल गया जिसके कारण होने बहुत ही नुकसान हुआ और वह एकदम गरीब हो गए। जब इंसान गरीब हो जाता है तो रिश्तेदार भी नाता तोड़ देते हैं पराया ही मान लेते हैं कुछ ऐसा ही मोहन के साथ हुआ अपनी दुकान से इतना नुकसान पाकर मोहन को आश थी कि उसके रिश्तेदार कुछ उसके मदद करेंगे फिर जब सब कुछ ठीक हो जाएगा तो वह उनके पैसे लौटा देगा लेकिन रिश्तेदारों ने बिल्कुल भी मदद न...

एक सच्चे प्यार की अनोखी प्रेम कहानी। सच्ची प्रेम कहानी hindi love story - 2021

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 एक सच्चे प्यार की अनोखी प्रेम कहानी। सच्ची प्रेम कहानी  यह कहानी है एक ऐसी लड़की की जो प्यार जानती थी पर प्यार के बारे में नहीं जानती थी मतलब उसने प्यार शब्द तो सुना था पर प्यार क्या होता है कैसे होता है क्यों होता है वह यह सब नहीं जानती थी। उस लड़की का नाम मीना था। मीना एक 18 साल की पढ़ी-लिखी सुंदर और अमीर घर  की लड़की थी।  वह पढ़ाई के लिए कॉलेज में जाया करती थी। मीना पढ़ाई में भी बहुत अच्छी थी लेकिन  अक्सर उसका मन प्यार के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो जाया करता था।  जब भी वह ऐसी उत्सुकता से भर जाती   थी। तो वह अपनी एक सहेली  रितु के पास जाकर बैठ जाया करती थी। और बस एक ही सवाल पूछा करती थी कि प्यार शब्द तो सुना है पर प्यार क्या होता है यह तो बता दे। उसका एक ही जवाब होता था प्यार बोलकर नहीं करके समझा जाता है जिस दिन तुझे किसी लड़के से सच्चा प्यार हो जाएगा।  उस दिन तू समझेगी कि प्यार क्या होता है अब मीना के लिए एक और सवाल खड़ा हो गया था कि प्यार और सच्चा प्यार  क्या यह दोनों अलग-अलग है। उसने अपनी सहेली रितु से पूछा है | मैंने प्य...

गीता की बहादुरी और गीता का आत्मविश्वास - हिंदी कहानी 2021

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गीता एक छोटे से गांव में अपने परिवार के साथ रहती थी | उसके परिवार में उसके माता-पिता और उसका एक बड़ा भाई आनंद था। वह अपने परिवार में बहुत खुशी से रहते थे | गीता अपने बड़े भाई  आनंद से बहुत डरती थी  क्योंकि वह उससे उम्र में बड़ा था  और माता-पिता भी गीता की बातों से ज्यादा आनंद की बातों को ही महत्व देते थे  | इसीलिए गीता को लगता था कि उसकी कोई बात नहीं सुनता और वह अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाती थी  जिस कारण वह अपने आप को बहुत डरा हुआ और अकेला महसूस करती थी। पर वह पढ़ने लिखने वाली लड़की थी तो वह विद्यालय जाती थी |  उसे विद्यालय में कुछ लड़के बहुत दिनों से तंग कर रहे थे लेकिन उसने घर में इसीलिए नहीं बताई की ना जाने माता-पिता क्या सोचते हैं शायद वह यह ना सोचें कि लड़कों से वह भी कोई संबंध रखती है | इसीलिए उसको देखकर और लड़के भी उसे तंग कर रहे थे | अपने भाई से कहना चाहती थी लेकिन डर के कारण वह नहीं कह पाई एक दिन वह अपने विद्यालय जा रही थी तो रास्ते में उसे वही लड़के तंग करने लगे वह वहां से निकल गई आगे चौराहे पर जाकर उससे उसका भाई मिल गया उसे लगा कि वह उसे यू...

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जिस स्टोरी को पढना चाहते हो उस पर क्लिक करें छोटी बच्ची की समय यात्रा की कहानी - time traval story  लॉकडाउन में गरीब अपना पेट कैसे भरें। दो दोस्त कैसे बने दुश्मन तीन बुद्धिमान दोस्तों की कहानी माता-पिता से ज्यादा अच्छा दोस्त दुनिया में कोई नहीं।  चोर के घर भी हुई चोरी।  माता पिता के मरने के बाद दी उन्हें इज्जत। आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक। सच्चे प्यार का दर्दनाक अंत हिंदी फुल स्टोरी  एक कुम्हार देश की मिटटी से गरीब से अमीर बन गया   उदित की कड़ी मेहनत रंग लाई  एक सच्चे प्यार की अनोखी प्रेम कहानी  कामयाबी की ऊँची उड़ान और नीचे गिरने का डर  रूचि जवानी में कदम रखने के बाद बचपन ना छोड़ पाई  गीता की बहादुरी गीता का आत्मविशास - 2021 मन में बचपन की बातें- 1  मन में बचपन की बातें -2  मन में बचपन की बातें -3  मन में बचपन की बातें पार्ट - 4  छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 1 छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 2 छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 3 बैन बादशाह शहजादी की कहानी पार्ट - 1  बैन बादशाह शहजादी की कहानी पार्ट - 2 अपने भाग्य का फल  ...

सौतेली माँ का प्यार - हिंदी कहानी, hindi story,2018

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सौतेली माँ का प्यार - हिंदी कहानी  क्रोध में भी जिसके होठों पर मुस्कान रहती है, गुस्से में भी हमेशा प्यार करती है, हर समय होठों पे जिसके दुआ रहती है, ऐसा करने वाली एक सिर्फ माँ होती है। । नमस्कार दोस्तों मैं मोहन एक ऐसी कहानी लेकर आया हूँ जो शायद ऐसा कभी कभी होता होगा लेकिन ज्यादातर इस कहानी के उल्टा ही होता है कहानी बहुत अच्छी है। अगर आप ध्यानपूर्वक बढ़ोगे तो कहानी में मजा बहुत आएगा चलिए दोस्तों ज्यादा टाइम बर्बाद न करते हुए कहानी की ओर चलते हैं - किसी शहर में विजेन्द्र नाम का एक आदमी रहता था उसके दो लड़के और एक लड़की थी। उसकी बीवी की मृत्यु हुए करीब डेढ़ साल हो चुके लेकिन अभी तक उसने दूसरी शादी के बारे में सोचा तक नहीं।विजेंद्र एक कम्पनी में सुपरवाइजर था। विजेन्द्र के बच्चे अभी छोटे थे तीनों बच्चो में सबसे बड़ा लड़का था जिसका नाम राहुल था। उससे छोटी उसकी एक लड़की थी जिसका नाम कविता था , सबसे छोटे लड़के का नाम अमित था तीनो भाई बहिन एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे लेकिन उनको अभी भी माँ के प्यार की शक्त जरूरत थी। उनकी मासूमियत बनी रहे इसलिए विजेन्द्र शादी नहीं कर...