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जिंदगी गरीबों के लिए एक जंग है। jindgi gareebon ke liye ek jang hai

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 जिंदगी गरीबों के लिए एक जंग है। यह कहानी है रामू की रामू एक बहुत ही गरीब मजदूर आदमी था। उसका परिवार भी बहुत ही गरीबी से गुजर-बसर कर रहा था। रामू रोज मजदूरी करता था तब वह अपने बच्चे और पत्नी का पेट भर पाता था। अगर वे किसी दिन मजदूरी करने नहीं जाता तो उसका परिवार भूखा सो जाता यह हालत थी उनके परिवार  की इसीलिए रामू बीमार होते हुए भी रोज मजदूरी करने चला जाता था।  उसकी पत्नी भी रामू का साथ देना चाहती थी वह भी मजदूरी करना चाहती थी लेकिन बच्चों को अकेला भी नहीं छोड़ सकती थी। क्योंकि बच्चे छोटे-छोटे ही थे एक लड़का 3 साल का था और एक लड़की 4 साल की थी। बच्चों की उम्र हो चुकी थी पढ़ाई करने की लेकिन घर में इतनी गरीबी थी कि बच्चों को कपड़े भी अच्छे नसीब नहीं होते थे। पढ़ाई लिखाई तो बहुत दूर की बात रही। वह दोनों चाहते थे कि वह अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर कोई अच्छा आदमी बनाए लेकिन गरीबी जिसके पास चली जाए उसके सारे अरमान मार देती है ऐसा ही रामू और उसकी पत्नी के साथ था।  उन्होंने अपने सारे अरमानों को मार दिया था। और उन्हें एक वक्त की रोटी के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। 1 दिन राम...

सौतेली मां का छुपा खजाना। souteli maa ka chhupa khajana

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सौतेली मां का छुपा खजाना। यह कहानी है विमला की। विमला पहले से ही शादीशुदा थी पर विधवा की शादी के 2 साल बाद ही उसके पति एक एक्सीडेंट में गुजर गए थे। और वह अकेली रहा करती थी। दूसरी तरफ मोहन। जो विमला का सगा भाई था विमला के लिए हमेशा परेशान रहता था। वह सोचता था। की जिंदगी अकेले तो नहीं गुजारी जा सकती। मुझे अपनी बहन का अकेलापन कैसे भी करके दूर करना ही होगा।  इसीलिए वह विमला से रोज किसी न किसी रिश्ते की बात करता रहता था लेकिन विमला मना कर दिया करती थी। विमला कहती थी कि मेरे पति की जगह कोई नहीं ले सकता वह भले ही मेरी जिंदगी में नहीं रहे लेकिन मेरी यादों में हमेशा रहेंगे। यह सुनकर मोहन अपनी बहन से कहता है देखो बहन जीजा जी को गुजरना था।  वह गुजर गए तुम्हारे सामने तुम्हारी पूरी जिंदगी है और यह जिंदगी ऐसे ही नहीं गुजारी जा सकती तुम तो जानती ही हो अकेली महिला को यह समझ जीने नहीं देता और ऊपर से तुम  विधवा भी हो पता है लोग कैसी कैसी बातें बनाते हैं। इस पर विमला ने कहा मुझे फर्क नहीं पड़ता लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं बस मुझे अकेला रहना है।  मोहन रोज अपनी बहन से एक ही बात कहता ...

किसी की औकात उसके कपड़ों से नहीं, मेहनत और हुनर से तय होती है – प्रेरणादायक कहानी

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किसी की औकात उसके कपड़ों से नहीं, मेहनत और हुनर से तय होती है – प्रेरणादायक कहानी रमेश एक गांव में रहने वाला बहुत ही होशियार और समझदार और बहुत ही पढ़ा-लिखा लड़का था उसका एक परिवार था जो गांव में ही रहता था। और वह उसी परिवार के साथ गांव में रहता था। रमेश को पढ़ना और  पढ़ाना बहुत ही पसंद था लेकिन उसके इतने गरीब हालात थे कि रमेश अपनी मनचाही पढ़ाई पूरी नहीं कर सकता था। इसलिए उसने सोचा कि क्यों ना मैं शहर चला जाऊं वही कुछ काम करूंगा और जो पैसे मिले करेंगे उन्हीं से मैं अपनी पढ़ाई भी पूरी कर लूंगा जब तक मेरी इच्छा पूरी नहीं होती मैं गांव नहीं आऊंगा। रमेश को पढ़ाई में सबसे ज्यादा कंप्यूटर से लगाव था।  उसने गांव में रहकर कंप्यूटर सीखा कंप्यूटर के बारे में जाना और कंप्यूटर से जुड़ी हर एक चीज उसे पता थी। इसलिए वह शहर आ गया और सोचने लगा कि अब मैं कौन सी नौकरी करूंगा यहां रहकर।  उसने सोचा कि क्यों ना मैं शहर में रहकर कोई कंप्यूटर की जॉब ढूंढ लूं उससे मेरा काम और आसान हो जाएगा क्योंकि जो काम पहले से आता है अगर उसी को आगे बढ़ाया जाए तो कोई परेशानी नहीं होती इसीलिए वह शहर में स्थित जितन...

chhoti bachchi ki badi kahani-1

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छोटी बच्ची की बड़ी कहानी पार्ट- 1  page 1 2   3 नमस्कार दोस्तों मेरा नाम मनोज कुमार है| में आप सभी को एक ऐसी कहानी की तरफ ले जा रहा हु जो एक पांच साल की छोटी बच्ची की जीवनी है| वह क्या क्या कराती है, दोस्तों आप चोंक जायंगे की वह पांच साल की छोटी बच्ची भी ऐसा कर सकती है| दोस्तों ये कहानी लम्बी जरुर है, लेकिन बोर करने वाली नहीं है| चलो में अब कहानी शुरू करता हु आपका टाइम भी ख़राब नहीं हो | कहानी के पात्र :-   छोटी बच्ची का नाम पूनम है ,लड़की के पिता का नाम रमेश है ,लड़की का भाई जो उसी के बराबर है उसका नाम दीपक है ,लड़की की माँ का नाम सुनीता है यह परिवार एक मिडिल परिवार है, इस कहानी में लड़की का पिता एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है | सुनीता घर का काम संभालती है |पूनम का भाई वेसे तो वो पूनम से छोटा है लेकिन हाईट में पूनम की ही बरावर लगता है | छोटा परिवार है , एक दिन पूनम के पापा यानी रमेश कम्पनी में अधिक काम होने की वजह से लेट आने वाले थे तो उन्होंने घर पर फोन किया की वो कुछ देरी से आयेंगे   तुम सब खाना खा लेना | में कम्पनी में खाकर आऊंगा | पूनम के दिमाग...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-3 Ajnavi hai par lagata hai apna saa rista

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 अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-3  अगर आपने इस कहानी का पार्ट 2 नहीं पढ़ा है तो कृपया करके पहले part 2  पढ़ ले तभी कहानी समझ में आयेगी    अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता Part 2    अब कहानी आगे.. जैसे ही साधु मंदिर के अंदर चले गए वैसे ही उन्हें रवि एक कोने में बैठा हुआ दिखाई दिया। और उसके हाथ में रिया की तस्वीर थी और उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। और वह धीमी आवाज में अपने आपसे कह रहा था कि मैंने ऐसी कौन से गुनाह किए थे जिसकी सजा भगवान मुझे इस तरह से दे रहा है जिस पत्नी को मैंने अपनी जान से ज्यादा माना अपने से ज्यादा उसकी परवाह कि आज वही कहती है कि मैं तुम्हें नहीं जानती तुम मेरे पति नहीं हो ऐसा कैसा हो सकता है भगवान मेरे साथ तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। तभी साधु ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा। और कहने लगे बेटा चिंता मत कर तेरी परेशानी अब जल्दी ही भगवान शिव दूर कर देंगे। क्योंकि तू जिसकी तलाश में यहां तक आ पहुंचा है जिसकी तस्वीर को निहार कर तू इस तरह रो रहा है वह मेरे पास है और सुरक्षित भी है बस फर्क इतना है कि वह तुझे पहचानने से इंकार कर रही है ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। Part-5

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अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। He is a stranger but it seems like a relation of our own. भगवान से प्रार्थना करने के बाद रवि वापस रिया के पास चला गया। और दिन रात उसकी सेवा करने में लग गया उसका पूरा ध्यान रखता और रिया के चक्कर में वह अपना ध्यान रखना तो लगभग भूल ही गया था। और भगवान से बस यही प्रार्थना करता हूं कि भगवान मेरी रिया कि याददाश्त वापस दिला दें। और रवि की दुआ भी रंग लाई रिया को जब 2 दिन बाद होश आया तब उसे थोड़ा थोड़ा सब कुछ याद आने लगा था। उसे बस अभी इतना ही याद था कि वह दोनों घर से पहाड़ी पर दर्शन करने के लिए निकले थे और रास्ते में उनका एक कार एक्सीडेंट हो गया और जिसमें वह दोनों बिछड़ गए और रिया एक नदी में जाकर गिर गई और वह बहने लगी डूबने लगी नदी में फिर उसके बाद में जो कुछ भी हुआ वह भी उसे याद था। पर एक्सीडेंट से पहले की कोई भी बात उसे याद नहीं थी। जब रवि को इस बात का पता चला तो रवि को बहुत खुशी हुई कि कम से कम इसे इतना तो याद आया कि मैं इसका पति हूं और हम दोनों एक कार एक्सीडेंट में बिछड़ गए थे अब भगवान ने चाहा तो धीरे-धीरे करके इसे अपने परिवार के बारे में भी सब कुछ याद आ...

अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। ajnabi hai par lagta hai apna sa rista Part-4

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  अजनबी है पर लगता है अपना सा रिश्ता। रवि साधु के पास गया। और कहने लगा रिया को पुरानी बातें याद दिलाना बहुत ही मुश्किल है। पता नहीं मैं यह सब कैसे कर पाऊंगा। कर भी पाऊंगा या नहीं मैं नहीं जानता। यह सुनकर साधु ने कहा। बेटा यह काम बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए मैं यह बात जानता हूं लेकिन नामुमकिन नहीं है। तुम कोशिश करते रहो देखना एक दिन तुम्हारी कोशिश जरूर कामयाब होगी और रिया को सारी पुरानी बातें याद आ जाएगी फिर वह तुम्हें भी पहचानने लगेगी और तुम्हारे साथ तुम्हारे परिवार में लौट जाएगी। ऐसा सुनकर रवि ने कहा बाबा तुम ठीक कहते हो मुझे अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए एक ना एक दिन मेरी कोशिश जरूर रंग लाएगी और रिया को सच में सब कुछ याद आ जाएगा उसकी याददाश्त वापस आ जाएगी और फिर मेरी जिंदगी दोबारा से खुशहाल हो जाएगी। फिर रवि वापस रिया के पास चला गया। और रिया से कहने लगा। कि तुम मुझे यह बताओ तुम्हें खाने में क्या क्या पसंद है तुम्हें कौन सा रंग पसंद है कौन से फूल पसंद है अपनी पसंद ना पसंद मुझे सब कुछ बताओ। तब रिया ने कहा मेरी पसंद ना पसंद मुझे खुद भी याद नहीं है। मुझे लगता है बाबा ने जो कहा था वह सच...