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कोमल की टाइम ट्रेवल एडवेंचर: एक आठ साल की लड़की की भविष्य में यात्रा

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नमस्कार दोस्तों क्या हाल है दोस्तों मैंने बहुत दिनों से कोई स्टोरी नहीं पोस्ट की उसके लिए में माफ़ी चाहता हूँ क्युकी लाइफ में उतार चढाव भी बहुत आते है   ये तो जिन्दगी का फंडा है | अब स्टोरी पे आता हूँ  time traval story  ये स्टोरी बहुत एडवांस है, इसमें एक लड़की होती है, जिसका नाम कोमल है | कोमल एक आठ साल की लड़की है और वह स्कूल जाती है कोमल के पिता का नाम महेंद्र है | जब कोमल स्कूल जाती है उसकी टीचर उसको बहुत प्यार करती है और उसको बहुत अच्छे से पढ़ाती है क्युकी कोमल बहुत होशियार लड़की है उसका पढाई में बहुत मन लगता है | वह पढाई में बहुत तेज है उसका दिमाग बहुत फ़ास्ट चलता है और वह सब बच्चियो से बिलकुल अलग है | कोमल कभी कोई शरारत नहीं करती इसलिए उसको सभी बहुत प्यार से बोलते है और उसके साथ अच्छे से पेश आते है | एक दिन कोमल स्कूल से घर आ रही थी कोमल स्कूल से पैदल चलकर घर तक आती है वह स्कूल से घर आ रही थी उसके रस्ते में जंगल भी पड़ता है तो वह जगल से गुजर रही थी उसने कुछ ऐसा देखा की उसको देखकर वह दंग रह गई लेकिन कुछ देख तक देखने तक वह चीज गायब हो गई | कोमल अपने घर आ गयी घर आकर...

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जिस स्टोरी को पढना चाहते हो उस पर क्लिक करें छोटी बच्ची की समय यात्रा की कहानी - time traval story  लॉकडाउन में गरीब अपना पेट कैसे भरें। दो दोस्त कैसे बने दुश्मन तीन बुद्धिमान दोस्तों की कहानी माता-पिता से ज्यादा अच्छा दोस्त दुनिया में कोई नहीं।  चोर के घर भी हुई चोरी।  माता पिता के मरने के बाद दी उन्हें इज्जत। आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक। सच्चे प्यार का दर्दनाक अंत हिंदी फुल स्टोरी  एक कुम्हार देश की मिटटी से गरीब से अमीर बन गया   उदित की कड़ी मेहनत रंग लाई  एक सच्चे प्यार की अनोखी प्रेम कहानी  कामयाबी की ऊँची उड़ान और नीचे गिरने का डर  रूचि जवानी में कदम रखने के बाद बचपन ना छोड़ पाई  गीता की बहादुरी गीता का आत्मविशास - 2021 मन में बचपन की बातें- 1  मन में बचपन की बातें -2  मन में बचपन की बातें -3  मन में बचपन की बातें पार्ट - 4  छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 1 छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 2 छोटी बच्ची की बड़ी कहानी - 3 बैन बादशाह शहजादी की कहानी पार्ट - 1  बैन बादशाह शहजादी की कहानी पार्ट - 2 अपने भाग्य का फल  ...

man me bachpan ki baaten -3

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पार्ट -    1      2       3      4 आपने पढ़ा .. अब में उनके होस्टल में रोज जाने लगा | फिर शायद मुझे लगा मेरी दोस्ती का रंग फीका पड़ रहा है | उस वक्त मेरी सगाई का दौर चलने लगा | घर में सगाई की चर्चा चलने लगी | अब आगे .. हमारी पिछली पोस्ट को पढने के लिए यहाँ क्लिक करें  - पार्ट -    1        2        3        4   अब आगे .. "वह सुख का साम्राज्य छोड़कर, में मतवाला बड़ा हुआ लुटा हुआ कुछ ठगा हुआ सा , सगाई का दौर मेरा शुरू हुआ दिल में एक चुभन सी थी , यह संसार अलबेला था मन में एक पहेली थी, मैं उस वक्त खड़ा अकेला था कहाँ गए खोजता था, जिनको हे बचपन ! ठगा दिया तूने अरे ! जवानी के फंदे में, मुझको फंसा दिया तूने वह भोली सी मधुर सरलता, वह प्यारा जीवन निष्पाप क्या आकर फिर मिटा सकेगा, तू मेरा मन का संताप बार बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त ख़ुशी मेरी किन्तु यह झंझट भरी, युद्ध क्षेत्र...

मन में बचपन की बातें 2

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मन में बचपन की बातें 2 पार्ट -    1       2        3         4     आपने पढ़ा..  पूरे स्कूल के बच्चे बिठा दिये और मुझे और अभिषेक को खड़ा रखा | और कहा अब बताओ क्या परेशानी है | मैं तो चुप रहा अभिषेक बोला सर मनोज से पूछो क्या बात है | अब तो अभिषेक भी बिठा दिया | अब तो डाट मुझे ही पड़ी थी | हमारी पिछली पोस्ट पढने के लिए यहाँ क्लिक करें अब आगे ... यहाँ से आगे तो हम धीरे धीरे कक्षा 8 में पहुंचे | उस वक्त कक्षा 8 बोर्ड हुआ करती थी | तो हम पढाई में जुट गे | इसके बाद कक्षा 8 की परीक्षा देने के बाद हमारा रिजल्ट आया तो उसमे रिजल्ट था की कक्षा में पहला स्थान था अभिषेक और दूसरा स्थान था मनोज मतलब मेरा और तीसरा स्थान बईसन चौथा पूनम का और पंचमा वर्षा का ऐसे ही सचिन का और मुन्ना का नहीं पता था | हम एक नई कक्षा 9 वी  में पहुंचे उसमे एक टोपर लड़की आई जिसका नाप प्रयंका था |  हम तो थे ही शरारती हमारी फिरसे वही धुन चालू लेकिन बईसन उधम कम करती या कहे न के बराबर जो ज्यादा उधम करते वह मनो...

मन में बचपन की बातें

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मन में बचपन की बातें  पार्ट -   1     2        3         4   नमस्कार दोस्तों मेरा नाम मनोज है में राजस्थान के भरतपुर जिले के गाँव फतेहपुर कलां में रहता हूँ सन 1  जनवरी २०१९ ''इस दिन मेरा अपने दोस्तों से नया साल आया है, जो हमारा कुछ नया बनाता है | मेरे जीवन में इस जनवरी से पहले की बाते - बचपन से आज तक हम तीन दोस्त हैं -मनोज (लेखक), अभिषेक और सचिन हम तीनो अपने जीवन में एक ख़ुशी की पतवार (डोर) लिए घूमते हैं | हमारा जीवन एक अतुल्य ख़ुशी भरा जीवन है | इनमे से एक तो बाहर गाँव या पास के गाँव का है उसके गाँव का नाम मूंढौती है जो मेरे गाँव से करीब २.०० किमी की दुरी पर है हम दोनों, में और अभिषेक बचपन से कक्षा १ से ३ तक मूंढौती गाँव में साथ साथ पढ़ते थे में इसे तभी से जानता हूँ उसके बाद में कक्षा 4 से अपने गाँव के सरकारी स्कूल में पढने लगा तो में यहाँ ज्यादा किसी को नहीं जनता था सिर्फ अपने पडौस के बच्चो के अलावा |  फिर कक्षा 5 में अभिषेक भी मेरे गाँव फतेहपुर कलां में पढने लगा तो उस वक्त...

सौतेली माँ का प्यार - हिंदी कहानी, hindi story,2018

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सौतेली माँ का प्यार - हिंदी कहानी  क्रोध में भी जिसके होठों पर मुस्कान रहती है, गुस्से में भी हमेशा प्यार करती है, हर समय होठों पे जिसके दुआ रहती है, ऐसा करने वाली एक सिर्फ माँ होती है। । नमस्कार दोस्तों मैं मोहन एक ऐसी कहानी लेकर आया हूँ जो शायद ऐसा कभी कभी होता होगा लेकिन ज्यादातर इस कहानी के उल्टा ही होता है कहानी बहुत अच्छी है। अगर आप ध्यानपूर्वक बढ़ोगे तो कहानी में मजा बहुत आएगा चलिए दोस्तों ज्यादा टाइम बर्बाद न करते हुए कहानी की ओर चलते हैं - किसी शहर में विजेन्द्र नाम का एक आदमी रहता था उसके दो लड़के और एक लड़की थी। उसकी बीवी की मृत्यु हुए करीब डेढ़ साल हो चुके लेकिन अभी तक उसने दूसरी शादी के बारे में सोचा तक नहीं।विजेंद्र एक कम्पनी में सुपरवाइजर था। विजेन्द्र के बच्चे अभी छोटे थे तीनों बच्चो में सबसे बड़ा लड़का था जिसका नाम राहुल था। उससे छोटी उसकी एक लड़की थी जिसका नाम कविता था , सबसे छोटे लड़के का नाम अमित था तीनो भाई बहिन एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे लेकिन उनको अभी भी माँ के प्यार की शक्त जरूरत थी। उनकी मासूमियत बनी रहे इसलिए विजेन्द्र शादी नहीं कर...

hindi story- Ek Mortgage bhoot ki kahani

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एक बाँधने वाला भूत की कहानी १  नमस्कार दोस्तों आज में एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहा हूँ जो इंसानो से परे भूतों की कहानी है कहानी मजेदार है  पूरी कहानी पढ़ने पर कहानी का मजा आएगा  (आवश्यक सुचना :- इस कहानी में बताई गयी कोई भी जगह या कोई भी मानव का दिया हुआ विवरण वास्तविक नहीं है इसमें सब कुछ काल्पनिक है और ये कहानी सिर्फ मनोरजन के लिए बनाई गई है।) एक गाँव में चार चोर रहते थे चारों चोर चोरी करने में बहुत माहिर थे।  चारों एक साथ रहा करते थे।  जब भी वे चारों चोर किसी भी चीज को चुराने की सोचते तो उनको वह बहुत आसानी से मिल जाती थी। क्योकिं वे बहुत चतुर थे। एक दिन चारों चोर चोरी करने निकल पड़े उनको चोरी करने के लिए एक घर मिल गया चारों उस घर के चारों तरफ देखकर अंदर चले गए उस घर का दरवाजा खुला था चारों को अंदर आने में कोई कठनाई नहीं आयी थी। चारों अब अंदर आने के बाद एक कमरे में घुस गए। कमरे में जाकर देखा तो वहाँ कोई भी नहीं था और ना ही कुछ चुराने लायक था। क्योंकि वह एक खण्डहर था जहाँ सिर्फ मनुष्यों की हड्डियां पड़ी थी। ये देखकर चारों बाहर...