संदेश

ईमानदारी, लगन और सच्चाई की मिसाल: अंजलि की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

चित्र
 अंजली एक आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकान पर काम करती है। उसकी तनख्वाह भी सीमित थी। वैसे तो अंजलि को ज्वेलरी पहनने का कोई शौक नहीं था।    लेकिन जिस दुकान पर वह काम करती थी उस दुकान पर उसे एक मोतियों का हार बहुत पसंद आया था। उसकी कीमत भी 30,000 थी  क्योंकि वह असली मोतियों का हार था। इसलिए उनमें चमक बहुत अच्छी थी और मोतियों की चमक से ही अंजलि को वह मोतियों का हार बहुत पसंद आया था। लेकिन वह उसे खरीद नहीं सकती थी क्योंकि जितनी उसकी कीमत थी  वह अंजलि के लिए बहुत ज्यादा थी। अंजलि अपनी तनखा में से ₹30 भी नहीं बचा पाती थी तो इतना महंगा हार कैसे खरीद लेती लेकिन अंजलि ने सोचा की कोशिश करने से सब कुछ हो सकता है मुझे बचत करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर पैसे बच जाया करेंगे तो उन पैसों को जोड़कर मैं कभी ना कभी  हार खरीद ही लूंगी। अब अंजलि अपनी तनखा में से कुछ पैसे बचाने की कोशिश करती लेकिन महीना खत्म होने तक उसके पास कुछ भी नहीं बच पाता था। अंजलि की लाख कोशिश के बावजूद भी कोई बचत।नहीं हो पाती थी। अंजलि परेशान रहने लगी की ऐसे तो मैं अपने लिए कभी कुछ नहीं खरीद पाऊंगी। कभी अपनी ...

विमला की अमावस की रात: शैतानी पूजा से शिवजी की दया तक

चित्र
विमला की अमावस की रात: शैतानी पूजा से शिवजी की दया तक   अमावस की काली रात जब आती है तो अपने साथ बहुत से ऐसे राज लेकर आती है जिन्हें हम आम इंसान नहीं जान पाते। और अनजाने में अगर  कोई आम इंसान उन राज का शिकार बन जाए तो जिंदगी तबाह हो जाती है।ऐसा ही कुछ हुआ था एक लड़की के साथ। उसका नाम था विमला। विमला गांव और शहर के बीच वाली सीमा में अपनी एक झोपड़ी बनाकर रहा करती थी। वह चाहती तो गांव में या शहर में भी रह सकती थी लेकिन उसने सीमा पर रहना इसीलिए सही समझा क्योंकि वह पूजा-पाठ में बहुत ज्यादा विश्वास करती थी। फिर चाहे वो किसी भी तरह की पूजा पाठ हो  विमला उनमें खूब विश्वास करती थी और अपने फायदे के लिए तरह-तरह  पूजा भी करती थी। और इन सब के बारे में किसी को पता ना चले इसलिए वह ऐसे एकांत में रहना पसंद करती थी। उसके घर के आस-पास में कोई भी घर नहीं था दूर दूर तक सिर्फ  पेड़ और  खेत थे। वह अपनी पूजा को पूरा करने के लिए कभी किसी जानवर की बलि दे देती  तो कभी अपना खून चढ़ाया करती। क्योंकि वह शैतानी पूजा ज्यादा करती थी। वह भगवान को भी मानती थी लेकिन भगवान के सामने उस...

और ज्यादा पाने का लालच पड़ गया भारी। aur jyada paane ka laalach pad gaya bhaari

चित्र
  और ज्यादा पाने का लालच पड़  गया भारी। एक गांव में आदित्य नाम का लड़का अपनी एक प्राणी से झोपड़ी में अपनी पत्नी और अपने एक छोटे से बच्चे के साथ रहता था। वह रोज काम करने जाता और रोज पैसे कमा कर अपने घर में  राशन लाकर रख दिया करता था उसका कोई महीने का काम नहीं था रोज मेहनत मजदूरी करता और उसी से अपना पेट भरता। अगर किसी दिन काम नहीं मिलता तो वह उदास हो जाता। और सोचने लगता कि आज अपनी पत्नी और अपने बच्चे  की भूख कैसे शांत करूंगा। आज काम नहीं मिला। तो पैसे भी नहीं है पास में और बिना पैसों के तो इस दुनिया में कुछ नहीं मिलता। फिर वह उदास चेहरा लेकर अपने घर चला जाता लेकिन उसकी पत्नी और बच्चे सब्र रख कर उस रात भूखे सो जाते और अगले दिन फिर से वह काम की तलाश में निकल जाता।  आदित्य के जीवन के दिन उसकी पत्नी और उसके बच्चे के साथ में ऐसे ही बीते थे जा रहे थे। लेकिन फिर भी वह खुश थे कि हम मेहनत इज्जत और इमानदार की खाते हैं भले ही हम गरीब हैं लेकिन किसी का हक मारकर नहीं मारते और मेहनत करके ही खाते हैं। 1 दिन आदित्य काम की तलाश में घर से निकला तो उसे उस दिन कोई काम नहीं मिला ...

मीना ने देश पर शहीद होकर अपने गांव का नाम रोशन किया | meena ne desh par shaheed hokar apne gaanv kaa naam roshan kiya

चित्र
  मीना ने देश पर शहीद होकर अपने गांव का नाम रोशन किया |  यह कहानी है एक 10 साल की मीना की। वह अपने माता पिता और अपने एक 15 साल के भाई के साथ गांव में अपने परिवार में रहती थी। वैसे तो मीना को पढ़ना बहुत पसंद था लेकिन पढ़ने से भी ज्यादा उसे बड़े-बड़े सपने देखना पसंद था। उसे जब भी पढ़ाई से वक्त मिलता वह बड़े-बड़े सपने देखने लगती। लेकिन जब वह 12 साल के हुई तो उसे थोड़ा समझ में आया कि हजार सपने देखने से कुछ नहीं होता एक ही सपना देखो उसी को सच करने में लग जाओ तब ही सपना सच होता है। तभी सच्ची खुशी मिलती है हजार सपने देखने से खुशी तो मिलेगी पर वह सच्ची खुशी नहीं होगी। अब मीना ने सोच लिया कि वह भी आईएएस में भर्ती होगी और अपने देश की रक्षा करेगी और अपने गांव अपने देश अपने माता पिता अपने भाई का नाम रोशन करेगी। लेकिन वह गांव में रहती थी तो गांव में रहकर भी उसके माता-पिता उसे पढ़ा तो रहे थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि मीना आईएएस बनना चाहती है तो वह डर गए कि गांव में तो लड़कियों को इतनी भी छूट नहीं कि वह मां-बाप से बिना पूछे बाजार चली जाए और ऐसा तो वह पूछ कर भी कभी नहीं कर सकती। वह मी...

नन्ही चिड़िया का घोंसला बना दोस्ती की निशानी। nanhi chidiya ka ghosla bana dosti ki nishani

चित्र
 नन्ही चिड़िया का घोंसला बना दोस्ती की निशानी। यह कहानी एक चिड़िया की है। उस चिड़िया की जिसके पास रहने के लिए अपना एक घोंसला भी नहीं था। वह अपने दोस्त के घोसले में ही रहा करती थी। लेकिन कब तक वह उसके साथ उसके घोसले में रहती और कब तक वह उसको अपने साथ रखता। चिड़िया को तो अपने लिए एक छोटा सा घोंसला बनाना ही था। और वह ऐसा करना भी चाहती थी। लेकिन समस्या थी पेड़ उसको कोई ऐसा पेड़ नहीं मिल रहा था जहां पर वह आराम से घोंसला बना सके और उस घोसले में रह सके। वह रोज ऐसे पेड़ की तलाश में निकल जाती लेकिन रोज निराश होकर वापस आ जाती। अगर पेड़ मिलता तो वहां आसपास पानी नहीं होता अगर पानी होता तो खाने की सुविधा नहीं होती कुछ ना कुछ परेशानी होती ही थी।  अब ऐसी असुविधा वाली जगह पर कोई भी रहना पसंद नहीं करेगा ऐसा ही चिड़िया के साथ था वह ऐसी असुविधा वाली जगह पर रहना पसंद नहीं कर रही थी। और चिड़िया अपने दोस्त से कहती थी तुम परेशान मत हो मैं जल्दी ही ऐसा पेड़ ढूंढ लूंगी जिसके आसपास सब तरीके की सुविधा हो और फिर मैं तुम्हारा घोंसला छोड़ दूंगी मैं अपना खुद का तिनका तिनका जोड़ कर एक खोसला बनाऊंगी। और फिर उ...

आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक। aalsi kisaan ko sikhaya uske bete ne sabak

चित्र
आलसी किसान को सिखाया उसके बेटे ने सबक।   यह कहानी है रामू की रामू एक गांव में रहता था वह एक किसान था वह एक बहुत ही आलसी किसान था क्योंकि उसके खेत तो बहुत थे।लेकिन वह उनमें कुछ काम नहीं करता था सिर्फ दिन भर सोता रहता था   खेतों में फसल की उगाई और उसकी देखरेख के लिए खेतों में नौकर छोड़ रखे थे और उन नौकरों पर सिर्फ हुकुम चलाता रहता था। कभी खेतों में जाकर भी नहीं देखता था क्योंकि उसे डर था की अगर मैं खेतों में गया तो मुझे काम करना पड़ेगा जिसके कारण मैं सो नहीं पाऊंगा।  रामू की इस आदत का खेतों में लगे नौकर बहुत फायदा उठाते थे। वह अच्छी फसल उगाते तो थे उन्हें बाजार में  बेचकर भी आते थे। और उसके बहुत अच्छे दाम भी मिलते थे लेकिन वह रामू किसान को सिर्फ उसके आधे पैसे ही देते थे। आधे पैसे नौकर आपस में बांट लिया करते थे। और जो पैसे वह रामू किसान को देते थे उसमें से भी अपनी पगार मांग लिया करते थे। और रामू को ना चाहते हुए भी नौकरों को पगार देनी पड़ती थी क्योंकि वह समझता था कि फसल बेचकर यही पैसे आए हैं और इसमें से मुझे इन्हें पगार देनी ही पड़ेगी वरना यह काम नहीं करेंगे।...

माता पिता के मरने के बाद दी उन्हें इज्जत। mata pita ke marne ke baad di unhe ijjat

चित्र
माता पिता के मरने के बाद दी उन्हें इज्जत।  यह कहानी है एक ऐसे लड़के दीपक की जो अपने मां-बाप की दिन और रात की मेहनत के बाद एक बहुत ही बड़ा अमीर बिजनेसमैन बन गया था लेकिन वह अपने मां बाप को भूल गया था कि वह भी इंसान है। वह अपने काम में इतना व्यस्त रहता कि उसे मां-बाप की याद भी नहीं आती थी और अगर दीपक अपने मां-बाप से मिलता था तो उनके पास बैठता भी नहीं था दूर से ही बात करता था गैरों की तरह हालचाल पूछता और चला जाता था। उसके इस व्यवहार से उसके माता-पिता हमेशा दुखी रहते थे तीज त्यौहार पर भी उसका यही व्यवहार रहता था  जिसकी वजह से उसके माता-पिता अपने आंसू नहीं रोक पाते थे। हमेशा भगवान से उन्हें यही शिकायत रहती थी कि भगवान तूने हमें बेटा दिया तो ऐसा क्यों दिया या तो तू बेटा ही नहीं देता और या उसमें गुण अच्छे देता। पर धीरे-धीरे करके उन्होंने भगवान को भी ऐसा कहना बंद कर दिया था क्योंकि वह समझ गए थे कि यह सब उनकी दिन और रात की कड़ी मेहनत का कड़वा फल है। यह सच बहुत ही कड़वा था लेकिन था  तो सच। कि कोई बेटा अपने मां-बाप को इस तरह से कैसे भूल सकता है। क्या दौलत ही सब कुछ होती है आज दीपक...